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Agra News : कोठी मीना बाजार में बनने वाला ये स्मारक वीरता और इतिहास को संरक्षित करेगा. शिवाजी महाराज के साहस और नेतृत्व क्षमता को नमन करता दिखेगा. केवल यूपी और महाराष्ट्र के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व …और पढ़ें
नज़रबंद क्यों किया गया
99 दिनों की नज़रबंदी और चतुराई
शिवाजी महाराज को नज़रबंद करने के बाद, वह लगभग 99 दिन तक वहां रहे, लेकिन अपनी चालाकी और होशियारी से उन्होंने और उनके पुत्र संभाजी महाराज ने 19 अगस्त 1666 को नज़रबंदी से भागने की योजना बनाई. प्रो. अनुराग पालीवाल बताते हैं कि शिवाजी महाराज ने पहले अपनी सेहत बिगड़ने का बहाना बनाना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने गरीबों को फल और मिठाई बांटने की योजना बनाई, ताकि उनके पास फल और मिठाई की टोकरी में छिपकर बाहर निकलने का मौका मिले. पहले तो सैनिकों ने इन चीजों की अच्छी तरह से जांच की, लेकिन बाद में वह इसे रूटीन फल वितरण समझने लगे. फिर, शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज ने फल और मिठाई की टोकरी में छुपकर नज़रबंदी से मुक्त हुए. यह घटना उनकी साहसिकता और चतुराई का प्रतीक बन गई.
कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस ऐतिहासिक स्मारक के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 करोड़ रुपए की पहली किस्त भेज दी है. यह राशि मंडलायुक्त आगरा को सौंप दी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार भी इस परियोजना में सहयोग दे रही है, ताकि इस स्मारक को और भी भव्य और आकर्षक बनाया जा सके. योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि यह स्मारक केवल एक स्मरण स्थल नहीं होगा, बल्कि यह पर्यटन के लिए भी एक बड़ा आकर्षण बन सकता है. उन्होंने कहा कि दोनों राज्य मिलकर एक ऐसा स्मारक तैयार कर रहे हैं, जो शिवाजी महाराज के जीवन और उनके शौर्यपूर्ण इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएगा.
आगरा में पर्यटन का नया दौर
शिवाजी महाराज के स्मारक के बनने से आगरा में एक नया पर्यटन स्थल बनेगा. यह स्मारक न केवल इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करेगा, बल्कि भारतीय वीरता और स्वतंत्रता की गाथा को याद करने के लिए एक महान स्थल होगा. इस स्मारक में शिवाजी महाराज की तस्वीरें, उनके महत्वपूर्ण संघर्षों और उनकी कूटनीतियों का इतिहास भी दर्शाया जाएगा.


