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बांस से बने ये प्रोडक्ट जितने खूबसूरत दिखते हैं, उतनी ही मेहनत इन्हें तैयार करने में लगती है. कारीगरों को सबसे पहले सही किस्म का बांस चुनना पड़ता है, क्योंकि हर प्रोडक्ट के लिए बांस का अलग होना जरूरी होता है. हल्के सामान के लिए नरम बांस और मजबूत व भारी चीजों के लिए कठोर बांस का इस्तेमाल किया जाता है, तभी जाकर ये प्रोडक्ट टिकाऊ और आकर्षक बन पाते हैं.

कैम्पियरगंज के लक्ष्मीपुर में बांस से बने ऐसे प्रोडक्ट तैयार होते हैं, जो देखने में जितने खूबसूरत होते हैं उतने ही उपयोगी भी. यहां कारीगर अपने हाथों से एक खास तरह का बांस का कप बनाते हैं, जिसकी डिमांड कभी ऑर्डर पर तो कभी सीधे बाजार में देखने को मिलती है. सादगी में खूबसूरती समेटे इस कप को तैयार होने में 2 से 3 दिन लगते हैं और बाजार में इसकी कीमत करीब 200 रुपये तक पहुंच जाती है.

बांस से बनी होम डेकोरेट लाइटें न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल होती हैं, बल्कि घर की सजावट में भी चार चांद लगा देती हैं. हाथों से तैयार की गई ये लाइटें इंटीरियर के साथ-साथ डेकोरेशन में भी शानदार दिखती हैं. इन्हें बनाने में 2 से 3 दिन का समय लगता है, लेकिन जब ये लाइट जलती हैं तो इनकी रोशनी और डिजाइन हर किसी का ध्यान खींच लेती है, खास बात यह है कि इनमें मनचाही किसी भी तरह की लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है.

अक्सर घर में मेहमान आने पर चाय-पानी परोसने के लिए स्टील या कांच की ट्रे का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कैम्पियरगंज के कारीगरों ने बांस से बनी ऐसी ट्रे तैयार की है, जो देखने में बेहद खूबसूरत और इस्तेमाल में मजबूत है. पतले बांस के टुकड़ों से तैयार यह ट्रे चाय, पानी और नाश्ता परोसने के लिए बिल्कुल उपयुक्त है. इसकी कीमत करीब 150 रुपये है और टिकाऊ होने के साथ-साथ यह घर की सजावट में भी खास पहचान बना देती है.
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बांस से बने ये डेकोरेटिव आइटम सादगी और सुंदरता का बेहतरीन उदाहरण हैं. इन्हें फूल रखने, छोटी घरेलू चीजें सजाने या फिर एक आकर्षक पॉट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. कारीगर इन्हें तैयार करने में 2 से 3 दिन लगाते हैं और बारीक कटाई के जरिए इन्हें खास रूप देते हैं. कुछ डिजाइनों में खास किस्म के नरम बांस का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इनकी फिनिश और भी खूबसूरत नजर आती है.

इस बार कारीगरों ने बांस के छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़कर एक खास तरह की टोकरी तैयार की है, जिसे फल रखने या रसोई में रोटी रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. कारीगर रंजीत बताते हैं कि इस टोकरी को बनाना सबसे ज्यादा मेहनत भरा काम होता है, क्योंकि बांस को बेहद पतले टुकड़ों में काटकर उन्हें मोड़ना और आपस में बारीकी से जोड़ना पड़ता है. यही वजह है कि यह टोकरी न सिर्फ खूबसूरत दिखती है, बल्कि मजबूत और टिकाऊ भी होती है.

इस खास बांस के कप को तैयार करने के लिए ऐसी किस्म के बांस का इस्तेमाल किया जाता है, जो थोड़ा सख्त और मजबूत हो. इसके हैंडल को बांस के बेहद पतले टुकड़ों से बारीकी से तैयार किया जाता है और बाद में पूरी तरह पॉलिश कर इसे आकर्षक रूप दिया जाता है. देखने में यह कप काफी खूबसूरत लगता है और रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए भी उपयुक्त है. कारीगरों के अनुसार, एक हफ्ते में करीब 50 ऐसे कप तैयार किए जाते हैं.

बांस से बने कुछ ऐसे खास प्रोडक्ट भी तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें घर की दीवारों पर टांगकर सजावट में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके साथ ही बांस के कारीगर इन दिनों बांस की घड़ियां भी बना रहे हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक लगती हैं. इन्हें तैयार करने में 2 से 3 दिन का समय लगता है और ग्राहक की पसंद के अनुसार इन पर मनचाहा रंग और पॉलिश भी की जा सकती है, जिससे ये घर की सजावट में एक अलग पहचान बनाती हैं.

गोरखपुर में तैयार होने वाले बांस के ये प्रोडक्ट अपनी खास बनावट और शानदार डिजाइन के लिए पहचाने जाते हैं. यहां लोग सीधे कारीगरों के पास पहुंचकर अपनी पसंद की कुर्सियां बनवाते हैं, तो कोई घर सजाने के लिए डेकोरेटिव आइटम ऑर्डर करता है. खास बात यह है कि कारीगर कम दाम में लोगों की जरूरत और पसंद के अनुसार बांस से खूबसूरत और टिकाऊ सामान तैयार कर देते हैं, जिससे ये प्रोडक्ट्स आम लोगों तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं.



