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Best Bajra Varieties for Summer: गर्मियों के सीजन में बाजरे की खेती किसानों के लिए दोहरे मुनाफे का सौदा बन सकती है. यह एक ऐसी फसल है जो कम पानी और चिलचिलाती धूप में भी लहलहाती है, जिससे किसानों को कीमती अनाज के साथ-साथ पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा भी मिल जाता है. जिला कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार, मार्च का महीना बुवाई के लिए सबसे बेहतरीन है. अगर आप भी कम लागत और कम समय में बंपर पैदावार चाहते हैं, तो बाजरे की कुछ खास आधुनिक किस्में आपकी किस्मत बदल सकती हैं. जानिए कैसे मात्र 60 से 80 दिनों में यह फसल आपकी आमदनी को दोगुना कर सकती है.

मोटे अनाजों में बाजरे की खेती किसानों के लिए बहुत ही लाभकारी मानी जाती है. इससे किसानों को दोहरा फायदा मिलता है क्योंकि अनाज के साथ-साथ पशुओं के लिए पौष्टिक चारा भी मिल जाता है. बाजरा खासतौर पर गर्म और शुष्क जलवायु के लिए बना है, इसलिए इसे बहुत कम पानी में भी आसानी से उगाया जा सकता है. इसकी खेती में लागत कम लगती है और फसल भी जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को एक ही सीजन में अच्छी आमदनी होती है.

पूसा कंपोजिट 701 बाजरे की यह किस्म उन किसानों के लिए बेस्ट है जो सीमित सिंचाई में अच्छा उत्पादन चाहते हैं. पूसा कंपोजिट 701 मात्र 80 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘मृदु-रोमिल’ और ‘असिता’ जैसे रोगों के प्रति प्रतिरोधी है, यानी इसमें बीमारियां कम लगती हैं. इससे एक हेक्टेयर में लगभग 23.5 से 41.2 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है.

अगर आपके इलाके में पानी की कमी है, तो एमपीएमएच-17 किस्म सबसे अनुकूल है. इसका सिट्टा (बाली) बालोंयुक्त होता है और दाना पीला-भूरा व गोलाकार होता है, जो खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है. यह किस्म भी 80 दिन में तैयार हो जाती है और इससे प्रति हेक्टेयर 26 से 28 क्विंटल तक की पैदावार ली जा सकती है. सूखा सहन करने की इसकी क्षमता इसे रेतीले इलाकों के लिए खास बनाती है.
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जिन किसानों को बहुत जल्दी फसल चाहिए, उनके लिए एचएचबी 67-2 सबसे उपयुक्त है. यह किस्म मात्र 62 से 65 दिनों में ही पककर तैयार हो जाती है. इसे आप अगेती या पिछेती दोनों तरह की बुवाई के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. इसकी बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर केवल 4 किलो बीज की जरूरत होती है और इससे 22 से 25 क्विंटल तक की उपज मिल जाती है.

आरएचबी-177 किस्म की ऊंचाई लगभग 150-160 सेमी होती है और इसके सिट्टे भी काफी लंबे (21-23 सेमी) होते हैं. यह ‘जोगिया’ रोग से सुरक्षित रहने वाली और 74 दिन में पकने वाली किस्म है. इसकी खास बात यह है कि इससे अनाज के साथ-साथ 42-43 क्विंटल तक सूखा चारा भी मिलता है. इसका दाना हल्का भूरा और गोलाकार होता है, जो शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए अत्यधिक उपयोगी है.

एचएचबी 299 बाजरे की एक आधुनिक बायोफोर्टीफाइड किस्म है, जिसमें आयरन की मात्रा बहुत अधिक होती है. यह सेहत के लिहाज से बहुत अच्छी है और 80 दिन में पकती है. इससे चारे की पैदावार भी 40-42 क्विंटल प्रति एकड़ तक मिल जाती है. अगर किसान इसका सही से रखरखाव करें, तो प्रति हेक्टेयर लगभग 19.6 क्विंटल से ज्यादा की शानदार पैदावार ली जा सकती है.

जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार बताते हैं कि गर्मियों के सीजन में बाजरे की मांग काफी बढ़ जाती है, जिससे किसानों को उपज का अच्छा दाम मिलता है. बाजरे का हरा चारा पशुओं की सेहत और दूध बढ़ाने के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. इसलिए किसान भाई अगर कम समय और कम पानी में अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो इन उन्नत किस्मों को अपनाकर अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं.



