लखनऊ में आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों का बसपा प्रमुख मायावती ने समर्थन किया है। उन्होंने सरकार से करीब 58 हजार पंचायत सहायकों की मानदेय बढ़ाने और स्थायीकरण समेत अन्य मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की है।
UP News: उत्तर प्रदेश में 58 हजार पंचायत सहायकों के आंदोलन का बसपा प्रमुख मायावती ने समर्थन किया है। साथ ही सरकार से उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि करीब 58 हजार पंचायत सहायक मानदेय बढ़ाने और संविदा व्यवस्था के बजाय स्थायीकरण की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से लखनऊ के ईको गार्डन के पास आंदोलन कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती रविवार को मीडिया से रूबरू हुईं। उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश के लगभग 58 हजार पंचायत सहायक अपना मानदेय बढ़ाकर उसे सम्मानजनक करने तथा संविदा व्यवस्था के बजाय स्थायीकरण आदि अपनी मांगों के समर्थन में, वे पिछले कुछ दिनों से राजधानी लखनऊ में इको गार्डन के पास आंदोलनरत हैं। सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार अवश्य करे तो ये बेहतर होगा।’
क्यों धरना दे रहे पंचायत सहायक
बता दें कि इको गार्डन में 7 सितंबर से पंचायत सहायक कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे पंचायत सहायकों ने एकजुट होकर सरकार से मानदेय बढ़ाने समेत सेवा से जुड़ी पांच सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग है। पंचायत सहायकों का कहना है कि वे लंबे समय से ग्राम पंचायत स्तर पर ऑनलाइन और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें महज छह हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है।
पंचायत सहायकों के यूनियन ने पंचायत सहायकों की पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें राज्य कोष से प्रतिमाह 18 हजार से 25 हजार रुपये तक सम्मानजनक वेतनमान सुनिश्चित करना, कार्य की प्रकृति के आधार पर नियमितीकरण कर स्थायी कर्मचारी का दर्जा देना, महिला पंचायत सहायकों के लिए स्थानांतरण व्यवस्था लागू करने तथा नगर पंचायत से प्रभावित पंचायत सहायकों का समायोजन करने और ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) एवं ग्राम पंचायत अधिकारी (वीपीओ) की भर्ती शामिल हैं।
बसपा सुप्रीमो ने की दिल्ली घोषणा पत्र की तारीफ
मायावती ने दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में जारी ‘दिल्ली घोषणा पत्र’ को सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की इच्छा भी उम्मीद जगाने वाली है। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के कारण बढ़े तनाव तथा शुल्क (टैरिफ) लगाए जाने जैसी गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे ब्रिक्स देशों द्वारा अपने 18वें शिखर सम्मेलन में दिल्ली घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से जारी किया जाना आपसी सूझबूझ और कूटनीतिक उपलब्धि से कम नहीं है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा भी उम्मीद जगाती है। इस दिशा में ब्रिक्स करेंसी का विकास भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इसके अलावा मायावती ने कहा कि फलस्तीन के मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र के समर्थन के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने की प्रतिबद्धता व्यक्त करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इससे भारत के दृष्टिकोण को उचित समर्थन मिला है, जो सराहनीय है।



