नाबालिग के परिजनों ने प्रशासन और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम के सामने शपथ पत्र देकर 18 साल की उम्र पूरी होने तक विवाह नहीं कराने का भरोसा दिया, लेकिन टीम के लौटते ही उसी शाम नाबालिग की शादी करा दी।
बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन की समझाइश और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद परिवार ने नियमों को धता बता दिया। इंदौर के गांधी नगर क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका के परिजनों ने प्रशासन और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम के सामने शपथ पत्र देकर 18 साल की उम्र पूरी होने तक विवाह नहीं कराने का भरोसा दिया, लेकिन टीम के लौटते ही उसी शाम नाबालिग की शादी करा दी। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नाबालिग से विवाह कराने वाले बालिग युवक, दोनों पक्षों के माता-पिता और रिश्तेदारों सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह कार्रवाई जिले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर की गई है।
पहले सगाई की बात, टीम के जाते ही करा दिया विवाह
मामले की शुरुआत चाइल्ड हेल्पलाइन पर मिली शिकायत से हुई थी। शिकायत के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग और चाइल्ड लाइन की टीम ने मामले की जानकारी जुटाई और परिवार को समझाइश दी। टीम ने परिजनों को स्पष्ट रूप से बताया कि नाबालिग की शादी 18 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद ही की जा सकती है। निर्धारित विवाह के दिन दोनों परिवार ड्रीम वर्ल्ड रिसोर्ट, गोम्मटगिरि पहुंच गए। इसी दौरान दोबारा शिकायत मिलने पर विभाग और चाइल्ड लाइन की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने दोनों पक्षों को समझाया और विवाह रोकने के लिए कहा।इस पर परिजनों ने शपथ पत्र देकर भरोसा दिलाया कि विवाह नहीं किया जाएगा और केवल सगाई की रस्म होगी। 24 जून को प्रस्तावित विवाह को निरस्त करने की बात भी कही गई। प्रशासनिक टीम परिवार को समझाकर वहां से लौट गई।लेकिन आरोप है कि टीम के जाते ही परिवार ने अपना वादा तोड़ दिया। उसी शाम नाबालिग का विवाह करा दिया गया।
रक्षाबंधन पर मायके आई तो ग्रामीणों को पता चला
परिजनों ने प्रशासन से विवाह निरस्त करने की बात कही थी, इसलिए मामला शांत मान लिया गया। बाद में रक्षाबंधन के दौरान जब बालिका अपने ससुराल से मायके पहुंची, तब ग्रामीणों को जानकारी मिली कि विवाह टला नहीं था, बल्कि नाबालिग की शादी पहले ही कराई जा चुकी थी।इसके बाद मामले की शिकायत प्रशासन तक पहुंची।
कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा मामला
मामले की जानकारी 1 सितंबर को कलेक्टर की जनसुनवाई में सामने आई। एक आवेदक ने विवाह से जुड़े प्रमाणों के साथ शिकायत की और बताया कि नाबालिग बालिका का विवाह कराया जा चुका है।शिकायत मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने कार्रवाई के लिए बाल विवाह विरोधी उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक को जांच के निर्देश दिए।
सोशल मीडिया पोस्ट ने खोला शादी का राज
जांच के दौरान टीम ने विवाह से जुड़े साक्ष्य जुटाए। उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक के अनुसार फोटोग्राफर और परिवार के सदस्यों द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए फोटो और वीडियो से विवाह होने की पुष्टि हुई।इसके साथ ही बालिका की उम्र से संबंधित दस्तावेज भी जुटाए गए। स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर उसकी आयु का प्रमाण तहसीलदार सांवेर के माध्यम से प्राप्त किया गया। सभी दस्तावेज और अन्य प्रमाण एकत्र करने के बाद कार्रवाई की गई।
बाल विवाह कराने वाले 9 लोगों पर केस
सभी साक्ष्य जुटाने के बाद बाल विवाह विरोधी उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक ने उड़नदस्ता सदस्य संगीता सिंह के साथ थाना गांधी नगर पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराई।पुलिस ने मामले में विवाह करने वाले बालिग युवक अभिषेक और रितिक सोनी, वर-वधू के माता-पिता तथा विवाह में शामिल रिश्तेदारों सहित कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
शपथ पत्र के बाद भी शादी, प्रशासन ने दिखाई सख्ती
इस मामले में खास बात यह है कि परिवार को प्रशासन और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम पहले ही समझा चुकी थी। इतना ही नहीं, परिजनों ने लिखित शपथ पत्र देकर नाबालिग की शादी 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद करने का भरोसा भी दिया था। इसके बावजूद विवाह करा दिया गया। रिपोर्ट – हेमंत



