
संवाददाता। विशाल गुप्ता।
काउंटर-ड्रोन तकनीक, प्रशिक्षण और फोरेंसिक जांच को मिलेगा बढ़ावा; आरटीसी बहरोड़ बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ।।
बीजपुर (सोनभद्र) देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को तेजी से उभरते ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। इस समझौते के तहत ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन तकनीक, प्रशिक्षण, फोरेंसिक जांच तथा संयुक्त अभ्यास के माध्यम से सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत किया जाएगा। एनटीपीसी रिहंद सीआईएसएफ के उप कमांडेंट प्रकाश ने बताया कि सीआईएसएफ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में एमओयू पर सीआईएसएफ की ओर से डॉ. सी.डी. नायक, डीआईजी एवं प्रिंसिपल, एमपी आरटीसी बहरोड़ तथा ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीण रंजन समेत बल के वरिष्ठ अधिकारी और डीएफआई के पदाधिकारी मौजूद रहे।
सीआईएसएफ वर्तमान में देशभर के 370 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहा है। इनमें विमानन क्षेत्र, परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरी जैसे अति-संवेदनशील प्रतिष्ठान शामिल हैं। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी भी दी गई है।
ड्रोन तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और उससे उत्पन्न संभावित सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए संदिग्ध ड्रोन की समय रहते पहचान, निगरानी, ट्रैकिंग और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है। सीआईएसएफ ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में ड्रोन तकनीक को शामिल किया है। अब तक तीन हजार से अधिक कर्मियों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि करीब 80 इकाइयां निगरानी, खतरे की पहचान और प्रशिक्षण के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। एमओयू के तहत आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन सिस्टम के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। डीएफआई भारतीय ड्रोन स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों के सहयोग से सीआईएसएफ की क्षमता निर्माण, व्यावहारिक अनुसंधान और परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में सहयोग करेगा। समझौते में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम की तैनाती के लिए एसओपी, डिप्लॉयमेंट फ्रेमवर्क और पायलट प्रोजेक्ट तैयार करना भी शामिल है। इसके अलावा संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों के विश्लेषण और घटनाओं के बाद आकलन के लिए स्वदेशी फोरेंसिक उपकरण विकसित किए जाएंगे। ड्रोन घुसपैठ की पहचान, ट्रैकिंग और जवाबी कार्रवाई की तैयारियों को परखने के लिए संयुक्त ड्रिल और रेड-टीमिंग अभ्यास आयोजित किए जाएंगे।
प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए विशेष मॉड्यूल, स्टूडेंट हैकथॉन और चैलेंज प्रोग्राम भी तैयार किए जाएंगे। सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि बदलते ड्रोन खतरों के दौर में यह साझेदारी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं, डीएफआई अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि भारतीय ड्रोन उद्योग स्वदेशी तकनीकी नवाचारों के जरिए सीआईएसएफ की जरूरतों को पूरा करने तथा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए आत्मनिर्भर सुरक्षा ढांचा विकसित करने में सहयोग करेगा।


