पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का 67 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। ‘साक्ष्य आधारित आयुर्वेद’ के प्रमुख ध्वजवाहक बालेंदु ने आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शनिवार को उनके पैतृक गांव सिकरौरा में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

पद्मश्री वैद्य बालेंदु का हार्ट अटैक से निधन
देश के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य, पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के पूर्व निजी चिकित्सक और ‘साक्ष्य आधारित आयुर्वेद’ के जनक पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश (67) का शुक्रवार रात उत्तराखंड सीमा से सटे उनके पैतृक गांव सिकरौरा स्थित रिसर्च सेंटर ‘रसशाला’ में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे। शनिवार दोपहर गांव में ही पुलिस प्रशासन ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके निधन से देश-विदेश के आयुर्वेद और शोध जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से रुद्रपुर में निवास कर रहे वैद्य बालेंदु प्रकाश ने आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र के सिकरौरा गांव में जड़ी-बूटियों पर अनुसंधान के लिए ‘रसशाला’ नाम से अपना रिसर्च सेंटर स्थापित किया था। उनकी पुत्री वैद्य शिखा प्रकाश ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था।
‘साक्ष्य आधारित आयुर्वेद’ के ध्वजवाहक थे वैद्य बालेंदु
वैद्य बालेंदु प्रकाश को ‘एविडेंस बेस्ड आयुर्वेद’ का प्रमुख ध्वजवाहक माना जाता था। वे पारंपरिक रस शास्त्र (आयुर्वेदिक औषधियों और भस्मों) के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को केवल ग्रंथों तक सीमित न रखकर वैज्ञानिक प्रमाणों और आधुनिक शोध से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया। चिकित्सा क्षेत्र में उनके इसी अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1999 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से नवाजा था।
‘पड़ाव स्पेशियलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर’ की स्थापना
उन्होंने देहरादून में ‘पड़ाव स्पेशियलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर’ की स्थापना कर असाध्य रोगों के उपचार को नई दिशा दी। कैंसर और पैंक्रियास (अग्न्याशय) से जुड़े जटिल रोगों के आयुर्वेदिक उपचार पर उनके द्वारा विकसित पद्धतियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया।
राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
शनिवार दोपहर सिकरौरा गांव में हुए उनके अंतिम संस्कार में प्रदेश के कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, पालिकाध्यक्ष चित्रक मित्तल और डॉ. वीके शर्मा समेत अनेक क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, चिकित्सक तथा सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे और उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पुलिस बल ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी।
आयुर्वेद जगत के लिए अपूरणीय क्षति
चिकित्सा जगत और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को आयुर्वेद के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। श्रद्धांजलि देने पहुंचे गणमान्य लोगों ने कहा कि आयुर्वेदिक भस्मों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने और इस विधा को वैश्विक स्तर पर नई विश्वसनीयता दिलाने में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक रहेगा




