फरवरी से अब तक बीते छह माह में आवश्यक खाद्य सामाग्रियों और रोजाना इस्तेमाल वाले एफएमसीजी उत्पादों की कीमत भी 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। रोजमर्रा की खाद्य सामग्री में नमक 30 रुपये से बढ़कर 32 रुपये प्रति किलो हो गया है।
मध्य-पूर्व में शुरू हुए जंग के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं का असर अब आमलोगों की रसोई और रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं पर भी दिखने लगा है। फरवरी से अब तक बीते छह माह में आवश्यक खाद्य सामाग्रियों और रोजाना इस्तेमाल वाले एफएमसीजी उत्पादों की कीमत भी 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। रोजमर्रा की खाद्य सामग्री में नमक 30 रुपये से बढ़कर 32 रुपये प्रति किलो हो गया है। बाबा ब्रांड चावल 40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो हो गया। अरहर दाल 125 से बढ़कर 130 रुपये, आटा 34 से बढ़कर 36 रुपये प्रति किलो हो गया है। इस बीच सबसे अधिक असर खाद्य तेल पर दिखा। सरसों तेल की कीमत 170 से बढ़कर 185 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चीनी 50 रुपये से बढ़कर 55 रुपये प्रति किलो और गुड़ 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
ये उत्पाद भी हुए महंगे
महंगाई का असर केवल खाने-पीने की वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक उपयोग के एफएमसीजी उत्पाद भी महंगे हुए हैं। कपड़े धोने वाला साबुन, जो पहले 38 रुपये में मिलता था, अब 42 रुपये में बिक रहा है। नहाने वाले साबुन की कीमत 23 रुपये से बढ़कर 25 रुपये प्रति पीस हो गई है। एक्टिव व्हील डिटर्जेंट 74 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 84 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है, जबकि सर्फ एक्सेल ब्लू की कीमत 135 रुपये से बढ़कर 147 रुपये प्रति किलो हो गई है। 500 ग्राम चायपत्ती का पैकेट भी 50 रुपये से बढ़कर 55 रुपये का हो गया है।
सर्फ और साबुन के भी दाम बढ़े
उत्पाद
धोने वाला साबुन
नहाने वाला साबुन
25 रुपये 50 पैसे
एडिबल (खाद्य) तेल
84 रुपये किलो
सर्फ एक्सेल
147 रुपये किलो
500 ग्राम 50 रुपये
चावल (बाबा)
सरसों तेल
इधर यह खेल
खुदरा कारोबारियों के अनुसार, बिस्कुट की कीमतों में तो बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कई कंपनियों ने ग्रामेज में कटौती की है। उदाहरण के लिए, 100 ग्राम वाले बिस्कुट अब 90–95 ग्राम के पैक में आ रहे हैं।



