नई दिल्ली. उद्घाटन समारोह खत्म हो चुका है. खिलाड़ियों के ठहरने और ट्रांसपोर्ट को लेकर जो अव्यवस्थाएं थीं, वे अब धीरे-धीरे रोजमर्रा का हिस्सा बन गई हैं. लेकिन अब वक्त शिकायतों का नहीं, मैदान पर प्रदर्शन का है. नागोया एशियन गेम्स में आज से असली मुकाबला शुरू हो रहा है और इसी के साथ भारत के पदक अभियान पर भी नजरें टिक गई हैं. सबसे बड़ा सवाल है क्या भारत हांगझोउ एशियन गेम्स 2023 के 107 पदकों के आंकड़े को छू पाएगा? या फिर उससे भी आगे निकल जाएगा, जैसा कि इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की अध्यक्ष पीटी उषा ने उम्मीद जताई है.
ग्लासगो में पहले ही 28-30 पदकों का अनुमान लगाया गया था और भारत ने उससे 10 पदक ज्यादा जीते थे. अब नागोया के लिए आकलन यह है कि भारत 100 पदकों का जादुई आंकड़ा छू सकता है. हालांकि, अंतिम मेडल टेबल में भारत किस स्थान पर रहेगा, यह काफी हद तक उसके गोल्ड मेडल की संख्या पर निर्भर करेगा.
आसान नहीं है राह
भारत के लिए चुनौती आसान नहीं है. डिफेंडिंग चैंपियन नीरज चोपड़ा और अन्नू रानी इस बार मौजूद नहीं हैं. 2023 की तुलना में शूटिंग का भारतीय दल भी छोटा है. ऐसे में गोल्ड मेडल जीतना आसान नहीं होगा. इसके बावजूद भारत के पास अलग-अलग खेलों में इतनी गुणवत्ता है कि वह ओवरऑल मेडल टेबल में टॉप-4 में जगह बनाने की क्षमता रखता है.
शूटिंग: 18-20 पदक
पहले सप्ताह में भारत की पदक उम्मीदों का सबसे बड़ा आधार शूटिंग होगी. लगभग हर दिन भारतीय निशानेबाजों के पास पदक जीतने का मौका होगा और कई स्पर्धाओं में एक ही दिन भारत के खाते में एक से ज्यादा पदक आ सकते हैं. अनुमान है कि शूटिंग में भारत 18 से 20 पदक जीत सकता है, जिसमें 7-8 गोल्ड शामिल हो सकते हैं. अगर सब कुछ भारत के पक्ष में रहा तो यह आंकड़ा 22-24 पदक तक भी पहुंच सकता है. इसकी पहली वजह भारतीय शूटिंग दल का छोटा होना है. दूसरी बड़ी वजह पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में अनिश्चितता है. केदार अगर अपने दिन पर रहे तो विश्व रिकॉर्ड जैसा प्रदर्शन कर सकते हैं. लेकिन अगर उनका प्रदर्शन सामान्य रहा तो भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है.
एथलेटिक्स: 26-30 पदक
एथलेटिक्स भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा पदक स्रोत बन सकता है. यहां भारत के खाते में 26 से 30 पदक आने का अनुमान है और यही खेल देश को 100 पदकों के आंकड़े के करीब पहुंचा सकता है. मुरली श्रीशंकर, तेजस्विन शंकर, गुलवीर सिंह, पारुल चौधरी और तेजिंदरपाल सिंह तूर जैसे खिलाड़ी भारत की पदक उम्मीदों को मजबूत करते हैं. नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी जरूर बड़ा नुकसान है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय एथलेटिक्स दल मजबूत है और अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है. एथलेटिक्स में अगर कुछ अप्रत्याशित पदक भारत की झोली में आते हैं तो कुल संख्या 100 के पार भी जा सकती है.
हॉकी- क्रिकेट: 2-2 गोल्ड
क्रिकेट में लक्ष्य बिल्कुल साफ है दो गोल्ड मेडल. भारत को पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक की उम्मीद होगी. यहां सिल्वर या ब्रॉन्ज से संतोष करने का सवाल नहीं है. हॉकी में भी भारत की दोनों टीमों से गोल्ड की उम्मीद है. पुरुष टीम को मजबूत दावेदार माना जा रहा है, जबकि महिला टीम ने हाल के प्रदर्शन में चीन को हराकर अपनी क्षमता दिखाई है. दोनों टीमों के गोल्ड मेडल भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि इससे LA28 की राह पर भी असर पड़ेगा.
स्क्वैश बैडमिंटन: 2-3 पदक
स्क्वैश में भारत के पास पदक जीतने की वास्तविक संभावनाएं हैं. इस खेल में तीन पदक एक उचित लक्ष्य माना जा सकता है. बैडमिंटन में भी भारत पदक की दौड़ में रहेगा. यहां 2-3 पदक मिलने की उम्मीद की जा सकती है. अगर सब कुछ उम्मीद के मुताबिक रहा तो सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी से गोल्ड की उम्मीद होगी.
कुश्ती और बॉक्सिंग तय करेंगे 100 का आंकड़ा
कुश्ती और बॉक्सिंग भारत के 100 पदकों के अभियान को बना भी सकते हैं और बिगाड़ भी सकते हैं. दोनों खेलों में भारत के पास कई अच्छे खिलाड़ी हैं. अगर इन खिलाड़ियों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया और कुछ अप्रत्याशित पदक भारत की झोली में आए तो देश मेडल टेबल के ऊपरी हिस्से में मजबूती से पहुंच सकता है.
अन्य खेलों पर नजर
कबड्डी में भारत का लक्ष्य गोल्ड मेडल होगा. भारत इस खेल में शीर्ष स्थान हासिल करने के इरादे से उतरेगा.रोइंग में भी भारतीय खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है. यहां भारत के पास पदक तालिका में कुछ और मेडल जोड़ने के मौके होंगे. टेबल टेनिस में इस बार भारत से पदक की उम्मीद बहुत ज्यादा नहीं है. इस खेल में भारत के लिए पदक जीतना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है. आर्चरी में भारत का प्रदर्शन मजबूत रहने की संभावना है. खासकर कंपाउंड टीमों से पदकों की बड़ी उम्मीद होगी और वे भारत के मेडल अभियान को आगे बढ़ा सकती हैं.
100 पदक भारत की पहुंच में
कुल मिलाकर नागोया में भारत के लिए 100 पदकों का आंकड़ा पूरी तरह पहुंच के भीतर है. लेकिन भारत 100 तक पहुंचता है या नहीं और अंतिम मेडल टेबल में किस स्थान पर रहता है, इसका फैसला बेहद मामूली अंतर से हो सकता है. कुछ अप्रत्याशित पदक भारत को 100 के पार ले जा सकते हैं, वहीं कुछ बड़े मौकों पर पदक चूकना तस्वीर बदल सकता है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण होगा गोल्ड मेडल की संख्या. भारत के कुल पदकों के साथ-साथ कितने स्वर्ण उसके खाते में आते हैं, यही तय करेगा कि नागोया में भारतीय दल की अंतिम तस्वीर कैसी रहती है.


