ग्रेटर नोएडा: सेक्टर-150 स्थित एटीएस ली-ग्रैंडिओस के पास टी-प्वाइंट पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन ने कुछ तात्कालिक कदम उठाए हैं, लेकिन हादसे के बाद भी इलाके में सुरक्षा हालात चिंताजनक बने हुए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि घटनास्थल पर खतरनाक जगहों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया गया है और यह भविष्य में हादसे की संभावना को कम नहीं करता.
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, हादसे से पहले घटनास्थल पर कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं थे. मृतक 2 घंटे तक मोबाइल की टॉर्च जलाकर कार पर बैठा रहा और मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की. न तो बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर, न चेतावनी बोर्ड और न ही पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था. मोड़ पर बने स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी भी नहीं थी, जिससे रात और कोहरे में तेज रफ्तार वाहन सीधे 30 फुट गहरे निर्माणाधीन बेसमेंट की ओर जा सकते थे.
मोड़ के पास रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए
हादसे के बाद प्रशासन ने बेसमेंट की ओर जाने वाले रास्ते को मिट्टी और निर्माण मलबा डालकर अस्थायी रूप से बंद किया है. मोड़ के पास रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं. स्थानीय निवासी विनोद यादव ने बताया, अब रिफ्लेक्टर और बोर्ड लगे हैं, जिससे खतरे का संकेत मिलता है. पहले यह व्यवस्था बिल्कुल नहीं थी. हालांकि, अन्य स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम सिर्फ एक मौत के बाद उठाया गया और सुरक्षा अब भी अधूरी है.
अजय ने कहा कि मलबा डालकर रास्ता बंद करना स्थायी समाधान नहीं है. हादसे से पहले भी कोई इंतजाम नहीं था और अब जो किए गए हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं. सड़क सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए सोसाइटी निवासी राहुल ने बताया कि स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी न होने के कारण रात में वाहन तेज रफ्तार में गुजरते हैं और हादसा होने की संभावना रहती है.
दूसरी ओर की सड़क भी टूटी
वहीं स्थानीय दुकानदार महेश ने हादसे वाले प्लॉट को लेकर प्राधिकरण और बिल्डर की भूमिका पर सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा कि गहरे बेसमेंट को बिना मजबूत बैरिकेडिंग और टीन शेड के छोड़ना नियमों का उल्लंघन है. एक और गंभीर खतरे की ओर आदिया ने ध्यान दिलाया. उन्होंने बताया कि मोमनाथल रोड की तरफ से आने वाला रास्ता अभी भी खुला है, जहां कोई बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड नहीं हैं. पुराने निवासी रामधीरज ने बताया कि दूसरी ओर की सड़क पूरी तरह टूटी हुई है और मरम्मत नहीं हुई.
ग्राउंड पर स्थिति साफ संकेत देती है कि हादसे के बाद किए गए इंतजाम अधूरे हैं. स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि सभी खतरनाक रास्तों को स्थायी रूप से सुरक्षित किया जाए, सड़क की मरम्मत हो, स्थायी बैरिकेडिंग और पर्याप्त रोशनी हो, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी की व्यवस्था तुरंत की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े.



