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Success story Jaunpur : साधारण किसान परिवार में जन्मी पूजा सिंह ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की मदद से वह मुकाम हासिल किया है, जो उनके लिए किसी सपने का सच हो जाने जैसा है. पूजा आज असिस्टेंट कमांडेंट हैं, लेकिन उनका सफर इतना आसान नहीं रहा. पूजा बताती हैं कि उन्हें निजी कोचिंग में पढ़ने के लिए 1-1.50 लाख रुपये चाहिए होते, जो उनके परिवार के लिए जुटाना असंभव था. यहां अभ्युदय योजना उनके काम आई. इस योजना को मुख्यमंत्री योगी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के होनहार विद्यार्थियों के लिए शुरू कराया है.
पूजा सिंह आज असिस्टेंट कमांडेंट हैं, लेकिन उनका सफर आसान नहीं रहा.लखनऊ. उत्तर प्रदेश का युवा अपनी नई पहचान गढ़ने में तेजी से आगे बढ़ रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी है कि कोई भी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए. जौनपुर की पूजा सिंह इसकी मिसाल हैं. किसान परिवार में जन्मी पूजा सिंह ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की मदद से वह मुकाम हासिल किया है, जो कभी उनके लिए सपना लगता था. पूजा ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना को अपने लिए सपनों को साकार करने वाला बताया है. पूजा का जीवन संघर्ष और संकल्प की जीवंत उदाहरण है. उनके पिता किसान हैं. सीमित आय में किसी तरह परिवार का पालन-पोषण करते हैं. पूजा ने बचपन से ही अभाव को काफी करीब से देखा. पूजा आज असिस्टेंट कमांडेंट हैं, लेकिन उनका सफर आसान नहीं रहा.
12वीं के बाद दिल्ली से लौट आईं
विकट हालात के बीच पूजा ने तय कर लिया था कि शिक्षा से वे न केवल अपना भविष्य संवारेंगी बल्कि अपने परिवार और गांव का नाम भी रोशन करेंगी. जौनपुर की रहने वाली पूजा ने 12वीं तक की अपनी पढ़ाई दिल्ली से पूरी की. आर्थिक दबाव के कारण दिल्ली में रहकर आगे की पढ़ाई को जारी रखना संभव नहीं था, इसलिए जौनपुर लौट आईं. लेकिन अपने मुकाम को नजर से ओझल नहीं होने दिया. जौनपुर में उन्होंने टीडी कॉलेज से स्नातक किया. यही वो दौर था जब आर्थिक समस्याएं पूजा के सपनों के आड़े आ गईं लेकिन प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से उन्हें सहारा मिला. वर्ष 2024 में पूजा ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के लिए आवेदन किया और स्कीम के तहत मुफ्त कोचिंग से जुड़ गईं. इस योजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के होनहार विद्यार्थियों के लिए शुरू किया है, ताकि आर्थिक दिक्कतें उनकी प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने.
बन गई संजीवनी
पूजा बताती हैं कि अभ्युदय योजना में उन्हें अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिला. नियमित कक्षाएं, व्यवस्थित पाठ्यक्रम और निरंतर अभ्यास से उनकी तैयारी को नई उड़ान मिली. पूजा कॉलेज के बाद शाम को डेढ़ घंटे की कक्षाओं में शामिल होतीं. शिक्षक बार-बार रिवीजन और नोट्स से विद्यार्थियों की नींव को मजबूत करते गए. पूजा बताती हैं कि उन्हें निजी कोचिंग संस्थान का सहारा लेना पड़ता तो 1-1.50 लाख रुपये तक का खर्च आता, जो उनके परिवार के लिए उठाना असंभव था. पूजा की तैयारी का नतीजा ये रहा कि वे अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी-सीएपीएफ परीक्षा में पास हो गईं. उनका चयन असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर हुआ. पूजा की सफलता से उनके परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना समाज कल्याण विभाग की ओर से चलाई जा रही है. इस स्कीम के तहत आईएएस, पीसीएस, नीट, जेईई और सीएपीएफ जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है.
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