
विंध्य ज्योति संवाददाता राजन जायसवाल
कोन (सोनभद्र),सोनभद्र के रोहिनवा दामर गांव में दूषित पेयजल से लोग प्रभावित हो रहे हैं। गांव के पानी में मानक से लगभग आठ गुना अधिक फ्लोराइड पाया गया है। इसके कारण कई परिवार अपंगता और बीमारियों से जूझ रहे हैं। 27 वर्षीय रिंकी उरांव इसका एक प्रमुख उदाहरण हैं।
रिंकी की मां सोमरिया देवी के अनुसार, तीन वर्ष की आयु तक रिंकी स्वस्थ थी और सामान्य बच्चों की तरह खेलती-कूदती थी। डेढ़ वर्ष में उसने चलना भी सीख लिया था। हालांकि, तीन वर्ष के बाद फ्लोराइड युक्त पानी के लगातार सेवन से उसके शरीर की हड्डियां जकड़ने लगीं। चार-पांच साल की उम्र तक वह पूरी तरह बिस्तर पर निर्भर हो गई।
वर्तमान में रिंकी के दोनों हाथ-पैर काम नहीं करते। वह चलने के लिए अपने शरीर को जमीन पर घसीटती है। 27 वर्ष की आयु होने के बावजूद उसका शारीरिक विकास रुक गया है, और वह 10-12 वर्ष की बच्ची जैसी दिखती है।
गंभीर स्थिति के बावजूद रिंकी को विकलांगता पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। परिजनों ने बताया कि बैंक में केवाईसी न होने के कारण उनका खाता बंद है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभनहीं मिल पा रहा। नियमित सरकारी इलाज की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
गांव में रिंकी जैसी स्थिति वाले दर्जनों अन्य लोग भी हैं, जो फ्लोराइड युक्त पानी के कारण गंभीर बीमारियों और अपंगता से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई है।यह स्थिति प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश में मुफ्त इलाज और कल्याणकारी योजनाओं के दावों के बावजूद, इस गांव के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इस मामले की तत्काल जांच और समाधान की आवश्यकता है।

