Last Updated:
हम बॉलीवुड की जिस शख्सियत के बारे में बात कर रहे हैं, उन्हें कभी सड़कों, रेलवे स्टेशनों पर दिन गुजारने पड़े थे. उनके पास तब कपड़े नहीं थे और वे भूख से मरते-मरते बचे थे. हम हिंदी सिनेमा के सुपर टैलेंटेड शख्सियत के बारे में बात कर रहे हैं, जिनकी पत्नी एक मशहूर बॉलीवुड अदाकारा हैं. उन्होंने सफलता देखने से पहले जिंदगी में बेहद कठिनाइयों का सामना किया था. आइए, उनकी निजी जिंदगी के साथ-साथ फिल्मी सफर के बारे में जानते हैं.

नई दिल्ली: ‘ये सर्द रात, ये आवारगी, ये नींद का बोझ…हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते’, यह नज्म उस शख्सियत के स्ट्रगल को बखूबी बयां करती है, जो हिंदी सिनेमा में कई दशकों से जगमगा रहा है. उसने अपनी काबिलियत से सिनेमा को नया रूप दिया. हालांकि, उन्हें भी जिंदगी में कई बार बुरे वक्त का सामना करना पड़ा. उन्हें भूख से तड़पना पड़ा और एक वक्त ऐसा भी आया जब उनके पास पहनने के लिए कपड़े भी नहीं थे, लेकिन हर बार वह उगते सूरज की तरह सिनेमा के कैनवास में छाए. (फोटो साभार: Instagram@azmishabana18)

भारतीय सिनेमा में राज कपूर, मधुबाला, मीना कुमारी, अशोक कुमार और राजेश खन्ना, दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन जैसी बड़ी हस्तियां आईं. लेकिन हम जिनकी बात कर रहे हैं, वह मशहूर बॉलीवुड हीरोइन के पति हैं. वे एक लेखक हैं. एक ऐसी शख्सियत जिनकी लिखी फिल्में उनके नाम से भी पहचानी गईं. वह शख्स हैं जावेद अख्तर. जावेद अख्तर 19 साल की उम्र में मुंबई आए थे, गुरु दत्त के असिस्टेंट बनने का सपना लेकर. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. जावेद के मुंबई पहुंचने के एक हफ्ते के भीतर ही गुरु दत्त का निधन हो गया और उनका सपना अधूरा रह गया. (फोटो साभार: Instagram@azmishabana18)

जावेद अख्तर मशहूर शायर जान निसार अख्तर के बेटे हैं और उनका परिवार साहित्य और शायरी से जुड़ा था. इसलिए लिखना उनके लिए स्वाभाविक था. मुंबई में जिंदा रहने के लिए जावेद ने नौकरी की तलाश शुरू की और जल्द ही उन्हें फिल्मकार कमाल अमरोही के यहां काम मिल गया, जो मीना कुमारी के पति और ‘महल’ व ‘पाकीजा’ के निर्देशक थे.(फोटो साभार: Instagram@azmishabana18)
Add News18 as
Preferred Source on Google

जावेद अख्तर ने यहां एक साल तक काम किया और सिर्फ 50 रुपये महीना कमाया. इसी दौरान उन्हें एक मशहूर लेखक के लिए घोस्टराइटिंग का ऑफर मिला. सैलरी अच्छी थी, लेकिन तीन दिन सोचने के बाद जावेद ने समझा कि नाम पैसे से ज्यादा जरूरी है. उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया और यही फैसला उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना. (फोटो साभार: Instagram@azmishabana18)

जावेद ने मुंबई के शुरुआती दिनों में कई मुश्किलें झेली, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा. उन्होंने डॉक्यूमेंट्री ‘एंग्री यंग मैन’ में बताया, ‘मैं दोस्तों के साथ रहा, रेलवे स्टेशन, पार्क, स्टूडियो के कंपाउंड, गलियारों, बेंचों पर सोया. कई बार दादर से बांद्रा तक पैदल जाता था क्योंकि बस का किराया नहीं था. कई बार दो-दो दिन तक खाना नहीं मिलता था. मैं सोचता था कि अगर कभी मेरी बायोग्राफी लिखी गई तो ये पल उसमें जरूर होंगे.’ (फोटो साभार: Instagram@azmishabana18)

जावेद अख्तर ने अपमानजनक हालात का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया था, ‘एक दिन मुझे अहसास हुआ कि मेरे पास पहनने के लिए कुछ नहीं है. मेरी आखिरी पैंट भी फट गई थी और वही एकमात्र पैंट थी.’ उन्होंने अपनी जिंदगी के कुछ ऐसे लम्हों को याद किया जो उन्हें आज भी झकझोरते हैं. वे बोले, ‘ऐसे दो-तीन पल हैं जिसने मुझ पर बहुत बुरा असर डाला. वो सदमा आज भी मेरे साथ है. दो-तीन दिन भूखे रहना बहुत दर्दनाक है. तीसरे दिन इंसान और कुत्ते में कोई फर्क नहीं रह जाता. आपकी सारी इज्जत, आत्मसम्मान सब धुंधला हो जाता है. बस एक ही चीज याद रहती है—भूख.’ (फोटो साभार: Instagram@azmishabana18)

जावेद अख्तर की फिर एसएम सागर से मुलाकात हुई, जो एक एक्शन फिल्म ‘सरहदी लुटेरा’ बना रहे थे. सागर ने उन्हें 100 रुपये महीने पर असिस्टेंट रख लिया. जावेद का काम था कलाकारों को डायलॉग रिहर्सल कराना. शूटिंग के दौरान फिल्म के डायलॉग राइटर ने काम छोड़ दिया. सागर ने जावेद से पूछा कि क्या वे डायलॉग लिख सकते हैं, तो उन्होंने कहा, ‘कोशिश करूंगा!’ (फोटो साभार: Instagram@azmishabana18)

जावेद अख्तर की उस कोशिश से उनकी जिंदगी बदल गई. जावेद फिल्म के डायलॉग राइटर बन गए और इसी फिल्म के सेट पर उनकी मुलाकात सलीम खान से हुई. ‘सरहदी लुटेरा’ बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, लेकिन यहीं से हिंदी सिनेमा की सबसे ऐतिहासिक लेखक जोड़ी की शुरुआत हुई. उन्होंने बाद में ‘हाथी मेरा साथी’, ‘शोले’, ‘जंजीर’ जैसी सुपरहिट फिल्में लिखीं और हिंदी सिनेमा का इतिहास बदलकर रख दिया. (फोटो साभार: Instagram@jaduakhtar)


