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सर्दी के मौसम में मेरठ की रेवड़ी और गजक की डिमांड अचानक बढ़ जाती है, क्योंकि इसे न सिर्फ स्वाद के लिए बल्कि सेहत के लिए भी बेहतरीन माना जाता है. तिल, मूंगफली, गुड़ और मेवा से तैयार की जाने वाली यह पारंपरिक मिठाई शरीर को गर्माहट देती है और सर्दी से बचाने में भी मदद करती है.

सर्दी की शुरुआत हो गई है, ऐसे में अगर आप मिठाई खाने के शौकीन हैं और ऐसी मिठाई की तलाश में हैं जिसे खाकर आप आनंदित हो जाएं, तो मेरठ की रेवड़ी-गजक आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है. यह न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट लगती है, बल्कि आपकी सेहत की देखभाल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

जी हां, दरअसल सर्दी की शुरुआत होते ही मेरठ में रेवड़ी और गजक बननी शुरू हो जाती है, क्योंकि इसकी डिमांड मेरठ ही नहीं, बल्कि देश भर के विभिन्न हिस्सों से देखने को मिलती है. बड़ी संख्या में लोग दीपावली सहित अन्य त्योहारों पर अपने परिचितों को रेवड़ी और गजक देना पसंद करते हैं. इसकी खासियत यह है कि इसे जिस तरह से तैयार किया जाता है, वह लोगों के लिए काफी लाभदायक होता है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेश के विभिन्न जनपदों के व्यंजनों की प्रशंसा करते हुए मेरठ की गजक का विशेष रूप से जिक्र किया है. उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे अपने आसपास के स्वाद की दुनिया की खोज पर निकलें या घर में ही बने स्वादिष्ट व्यंजनों की फोटो या वीडियो लेकर #OneDistrictOneCuisine के साथ सोशल मीडिया पर साझा करें. ताकि उत्तर प्रदेश की समृद्ध और स्वादिष्ट खान-पान परंपरा देश और दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचे और पर्यटन की नई तरंग को बढ़ावा मिल सके.

रेवड़ी–गजक व्यापारी कुशाग्र के अनुसार, मेरठ में बनने वाली गजक की डिमांड देश के विभिन्न राजनीतिक गलियारों में भी खूब देखने को मिलती है. जब भी कोई राजनेता दिल्ली की ओर रुख करता है, तो वह मेरठ से गजक और रेवड़ी जरूर लेकर जाता है. इसकी वजह है कि इस मिठाई को बनाते समय क्वालिटी के साथ-साथ सेहत का भी खास ध्यान रखा जाता है. सर्दी के मौसम में यह मिठाई लोगों की सेहत के लिए बेहद लाभदायक मानी जाती है.

कुशाग्र बताते हैं कि वर्तमान समय में लोग विभिन्न फ्लेवर और वैरायटी की मिठाइयां खरीदना पसंद करते हैं. इसी वजह से मेरठ में 55 से अधिक प्रकार की गजक वैरायटी तैयार की जाती है. इनमें छोटे बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग—सभी की पसंद का ध्यान रखा जाता है, ताकि जो भी मेरठ की गजक खाए, वह आनंदित हुए बिना न रहे.

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में छोटे बच्चे दुकानों से चॉकलेट के विभिन्न फ्लेवर खरीदते हुए दिखाई देते हैं. ऐसे में बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए चॉकलेट, पाइनएप्पल, मलाई, चीनी गजक, गुड़ गजक, गजक रोल सहित कई तरह की गजक भी तैयार की जाती है, जिन्हें हर कोई आसानी से खा सकता है.

वे बताते हैं कि लगभग 100 साल पहले रामचंद्र सहाय ने रेवड़ी और गजक बनाने की शुरुआत की थी. तब से लेकर आज तक लोगों में इन दोनों मिठाइयों के प्रति जबरदस्त दीवानगी देखी जाती है. जैसे ही सर्दी की शुरुआत होती है, मेरठ के बुढाना गेट बाजार में लोगों को रेवड़ी, गजक और लड्डू खरीदते हुए आसानी से देखा जा सकता है.

बताते चलें कि रेवड़ी–गजक को तैयार करने के लिए एक नहीं, बल्कि कई कारीगरों की मेहनत लगती है. ऐसे में अगर आप भी रेवड़ी–गजक खरीदना चाहते हैं, तो मेरठ के बुढ़ाना गेट पर आपको बड़ी संख्या में इससे संबंधित दुकानें दिखाई देंगी. इसकी कीमत 300 रुपये से लेकर 1200 रुपये प्रति किलो तक होती है.



