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अंजू ने चेन्नई में 23वें मास्टर एशिया एथिलेटिक्स में ट्रिपल जंप और 4×100 मीटर रिले में दो गोल्ड जीतकर भारत का नाम रोशन किया. अंजू ने बताया कि उनके इस सफल यात्रा में सबसे बड़ा योगदान उनके पति का है. अंजू का अब ओलम्पिक खेलने का सपना है.
भोजपुर. आरा की बहू ने बिहार समेत पूरे भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. भोजपुर जिले के खजुरिया गांव की बहू अंजू ने 23वें मास्टर एशिया एथिलेटिक्स में दो गोल्ड मेडल जीतकर भारत के झोली में डाल दी है. दरसल तमिलनाडु के चेन्नई में 5 से 9 नवंबर तक आयोजित 23वें एशिया मास्टर एथिलेटिक्स में 21 देशों के खिलाड़ी शामिल हुए थे. इसमें अंजू ने ट्रिपल जंप और 4×100 मीटर रिले में सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारत को दो गोल्ड मेडल दिलाया. अंजू कुमारी वर्तमान में पूर्व मध्य रेलवे में उप मुख्य टिकट निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं.
अपने कोच पति को दिया जीत का श्रेय
बता दे कि अंजू ने 2018 में बेंगलुरु में हुए मास्टर्स नेशनल एथलीट में तीन स्वर्ण और एक रजत पदक भी जीती थी. उनकी सबसे बड़ी सफलता तब थी, जब अंजू ने 2019 में मलेशिया में हुए एशियन मास्टर्स एथलीट प्रतियोगिता में 3 स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रौशन किया. वहीं 2020 में इम्फाल में हुए नेशनल एथलीट में भी चार स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं. इस बार अंजू का लक्ष्य भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए गोल्ड दिलाना था. अपना लक्ष्य हासिल करते ही अंजू ने स्वर्ण अक्षरों से अपना नाम अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में मेडल जीतने वाली खिलाड़ियों में शामिल करा ली. अंजू अपनी सफलता के पीछे अपने पति और कोच को मानती हैं. जिसने बखूबी अंजू का साथ दिया है और आज अंजू के बेहतर प्रदर्शन में उनके कोच सह पति रितेश यादव का बहुत बड़ा योगदान है.
ओलम्पिक खेलने का है सपना
फोन पर जानकारी देते हुए पति सह कोच ने बताया कि अंजू ने खेतों की मेढ़ पर दौड़कर यह मुकाम हासिल की है. आगे बताया कि वह मूल रूप से बिहार के आरा की रहने वाली है. एक ऐसे गांव से निकली है जहां पर आज संसाधन उपलब्ध हो गया है. सरकार भी खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है पर उस जमाने में कुछ भी नहीं था. लेकिन अपने हौसले की बदौलत वो यहां तक पहुंच सकी है. अंजू का सपना है कि वो विश्व चैंपियन और ओलम्पिक में देश का प्रतिनिधित्व करे.
अंजू एथलेटिक्स ओलम्पिक में सेकंड के कुछ ही हिस्सों से क्वालिफ़ाई करने से चूक गयी थी. जिसका आज भी उसे मलाल है. अंजू का कहना है कि शादी होने के बाद दस साल तक वो ट्रैक से दूर रहीं, लेकिन उनके ससुराल और खास कर पति के सहयोग से दोबारा ट्रैक पर लौटीं और फिर लगातार कई प्रतियोगिता में पदक जीतने का काम किया है, अब वह ये सिलसिला लगातार आगे बढ़ाती रहेगी.
पीटी उषा आदर्श
देश की मशहूर एथेलेटिक पीटी उषा को अंजू अपना आदर्श मानती हैं. उनकी ही तरह गोल्डन गर्ल बनने का सपना रखती हैं. अंजू ने यह भी बताया कि इतनी सफलताओं के बावजूद बिहार सरकार से कोई मदद नहीं मिलती है, जिससे वो आगे नहीं बढ़ पाती हैं. अंजू कुमारी को नीतीश सरकार से खासी नाराजगी है कि इतने पदक जीतने के बाद भी बिहार सरकार ने उनकी पूछ तक नहीं की और न ही उनसे कभी मिलने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि मेरी नौकरी खेल कोटे से नहीं हुई है बल्कि एग्जाम पास कर नौकरी ली है. बरहाल अंजू इन सब बातों को पीछे छोड़कर अपने प्रदर्शन में जी जान से जुटी हैं.
जीत चुकी हैं 143 स्वर्ण पदक
अंजू फिलहाल दानापुर रेल मंडल के पटना जंक्शन पर उपमुख्य टिकट निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जो अपने काम के साथ-साथ अपने एथेलेटिक्स प्रदर्शन में भी लगातार अव्वल रहती हैं. अंजू की सफलता पर एक नजर डालें तो अंजू ने स्कूल के समय से ही जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था. 1992 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता. इसके बाद 2003 में राष्ट्रीय स्तर के इंटर विश्वविद्यालय एथेलेटिक्स में तीन तीन स्वर्ण पदक जीते. अंजू अब तक 143 स्वर्ण पदक चुकी हैं.


