मिर्जापुर : देश में अगर कालीन की बात हो तो मिर्जापुर की कालीन का नाम सबसे पहले आता है. इस शहर को कालीन नगरी के नाम से जाना जाता है. मिर्जापुर जिले में हाथों से तैयार होने वाली सबसे महंगी कालीन की कीमत एक लाख 20 हजार रुपये है. महज 5 फीट लंबी कालीन में कश्मीर के सबसे महंगे सिल्क का प्रयोग हुआ है. यही वजह है कि इसका दाम काफी अधिक है और इसकी डिमांड अमेरिका, यूरोप और चाइना में सबसे ज्यादा है.
विलेज एंड विवर्स कंपनी के मालिक विक्रम जैन ने लोकल 18 से बताया कि मिर्जापुर की सबसे महंगी कालीन आम्ब्रे इफ़ेक्ट वाली हाथों से बुनी हुई कालीन है. कालीन का रंग डार्क से लाइट रंग की तरफ गया है और उभरा हुआ बनाया गया है. यह सिल्क से बनी हुई कालीन है. इसलिए इसे मिर्जापुर ही नहीं बल्कि भदोही व कश्मीर की सबसे महंगी कालीन कह सकते हैं. इस कालीन का दाम 35 हजार रुपये प्रति स्क्वायर मीटर से शुरू होकर 60 हजार या उससे अधिक जा सकता है. इसमें अगर छोटे-छोटे फूल या डिजाइन की जाए तो इसका दाम और भी बढ़ जाता है. जैसे कालीन की डिमांड बॉयर की तरफ से आती है. वैसी कालीन हम लोग तैयार करते हैं.
एक लाख 20 हजार रूपये है दाम
कालीन कारोबारी विक्रम जैन ने बताया कि यह 5×8 फीट का गलीचा है. इसका दाम 1 लाख 20 हजार रुपये है. यह 1 लाख 50 हजार या उससे अधिक भी जा सकता है. बशर्ते यह बॉयर पर निर्भर रहता है कि उन्हें कैसी कालीन चाहिए और कैसी डिजाइन में चाहिए. महंगी कालीन की डिमांड अमेरिका और यूरोप में सबसे ज्यादा है. वर्तमान में वियतनाम, फिनलैंड व जापान जैसे देशों में मांग बढ़ी है. कुछ सालों में इन देशों में डिमांड दोगुना से ज्यादा बढ़ गया है.
4 महीने लगता है समय
विक्रम जैन ने बताया कि इस कालीन को बनाने में 4 महीने का समय लगता है. कालीन को बनाने में कश्मीर का प्योर यार्न सिल्क का प्रयोग हुआ है. बुनकर सबसे पहले इसका लूम तैयार करते हैं. फिर सिल्क से बेहद ही बारीकी से हाथों से बुनते हैं. इस कालीन को 9 इंच बनाने में 14 हजार बार बुनाई की जाती है. इसमें जितने सिल्क का इस्तेमाल होता है. उतनी ही कीमत बढ़ती जाती है. कालीन को अगर दो बुनकर 8 घंटे लगातार मेहनत करके बुनाई करेंगे, तब कहीं 4 से साढ़े चार महीने में बनकर तैयार होता है.
कालीन पर जीआई टैग
विक्रम जैन ने बताया कि ऐसे महंगे कालीन की पहचान उसके ब्रांडिंग से होती है. हर कालीन में जीआई का टैगमार्क रहता है, जो सरकार के द्वारा हम लोगों को प्रदान किया गया है. इसमें हैंड टैग लगता है. कालीन को पलटकर देखने के बाद इसकी बाइंडिंग दिखती है, जो बेहद ही पतली और हाथ से बुनी हुई दिखाई देती है. इसको देखकर भी आप कालीन की पहचान कर सकते हैं. मशीन से बुनी हुई कालीन की बाइंडिंग काफी मोटी होती है.
ऑर्डर पर होता है तैयार
विक्रम जैन ने बताया कि महंगी कालीन बॉयरों की डिमांड पर तैयार की जाती है. वहीं, कुछ कालीन हम लोगों के द्वारा पहले से ही तैयार करके रखा जाता है. कई बार बॉयरों को जल्दी कालीन चाहिए होता है. ऐसे में हम लोग डिमांड के अनुसार पहले से ही 4 से 5 बनाकर रखते हैं. क्योकि, हर देश में अलग-अलग रंग के कालीन की मांग रहती है. उनकी मांग के अनुरूप पहले से ही कुछ कालीन बनाकर रखते हैं. यह तैयार होने के बाद बेहद ही कम समय में बिक भी जाता है.
चाइना बड़ा खरीददार
विक्रम जैन ने बताया कि फिलहाल में बड़े देशों में चाइना में हस्तनिर्मित कालीन की डिमांड बढ़ी है. सबसे ज्यादा महंगी कालीन की डिमांड चाइना से आ रही है. क्योकि, चाइना के लोगों के पास पैसे अधिक है और दुनिया की महंगी से महंगी कालीन को खरीदकर अपने घरों में रख रहे हैं. वहां के लोगों के द्वारा लाइट रंग की कालीन की मांग ज्यादा की जा रही है, जिसे हम लोगों के द्वारा बनाया जा रहा है.



