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वो सुपरस्टार हीरोइन जिन्होंने दिलीप कुमार से लेकर राज कपूर संग काम किया. उनका नाम कपूर खानदान के लाडले संग भी जुड़ा. मगर रिश्ता आगे न बढ़ सका. फिर उन्होंने जिनसे शादी की सब चौंक गई.

कुछ कलाकार फिल्म इंडस्ट्री में आते हैं और केवल कला के जरिए ही नहीं बल्कि सीमाएं तोड़कर और स्टारडम की परिभाषा को बदलकर एक कभी ना मिटने वाला छाप छोड़ देते हैं. वैजयन्ती माला ऐसी ही एक्ट्रेस हैं. (फोटो: IMDb)

एक युवा भरतनाट्यम डांसर वैजयन्ती माला ने तमिल फिल्मों से करियर की शुरुआत की और फिर हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान बनाई. चेन्नई के एक परंपरागत तमिल ब्राह्मण अय्यंगर परिवार में जन्म होने के बावजूद,उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने कमाल की एक्टिंग से अलग मुकाम हासिल किया. (फोटो: IMDb)

1950 और 60 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री में उनका ऐसा दबदबा कायम हुआ कि वो मीना कुमारी, मधुबाला, नरगिस, सुचित्रा सेन, वहीदा रहमान जैसी अभिनेत्रियों की बराबरी करने लगीं थीं. कई दफा तो ऐसा हुआ कि उन्होंने एक्टिंग के मामले में उनको भी पीछे छोड़ दिया. (फोटो: IMDb)

वैजयन्ती माला ने छोटी उम्र से ही फिल्मी दुनिया में कदम रख दिया था. 1949 में तमिल फिल्म वाज्काई से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. हालांकि उनका ये फिल्मी सफर आसान नहीं रहा. इंडस्ट्री में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था जिनमें बॉडी शेमिंग भी शामिल थी. (फोटो: IMDb)

एक बार हिंदी फिल्म नागिन के निर्देशक नंदलाल जसवंतलाल ने उनके शरीर को लेकर ऐसी भद्दी टिप्पणी की, जिससे वो इतनी आहत हुईं कि वो रो पड़ीं. उन्होंने वैजयन्ती माला को ताना मारते हुए इडली तक कह दिया था. जिसका जिक्र उन्होंने अपनी आत्मकथा BONDING में किया है. (फोटो: IMDb)

वैजयन्ती माला ने आगे लिखा कि, तुम बहुत मोटी हो और तु्म्हारे चेहरे पर बेबी फैट है तुम्हारा चेहरा इतना गोल है कि पूरी स्क्रीन भर देता है. इडली जैसी मत दिखो. फिल्ममेकर पूरी क्रू के सामने ही उनका मजाक उड़ाते थे जिससे कई बार उनकी आंखों में आंसू आ जाते थे. (फोटो: IMDb)

फिल्म देवदास से पहले उन्हें इंडस्ट्री में एक डांसर के तौर पर ही जाना जाता था और ये बात वो खुद भी मान चुकी थीं. हालांकि फिल्म गंगा जमुना, आम्रपाली और संगम जैसी फिल्मों में उन्होंने इस छवि को तोड़ने की कोशिश जरूर की लेकिन उनको सिर्फ “डांसिंग डॉल ” के रूप में सीमित कर दिया गया था. लेकिन फिल्म देवदास उनकी करियर के लिए टर्निंग पॉयंट साबित हुई. (फोटो: IMDb)

1955 में दिलीप कुमार के साथ रिलीज हुई फिल्म देवदास ने वैजयन्ती माला की डांसर वाली छवि को बदल दिया. फिल्म क्रिटिक्स ने उनकी खूब सराहना की. जिसका नतीजा हुआ कि उनके पास फिल्मों की झड़ी लग गई और अंत में इंडस्ट्री ने उन्हें बतौर एक्ट्रेस स्वीकार कर लिया. (फोटो: IMDb)

फिल्म देवदास के हिट होने के बाद दिलीप कुमार और व्यजयंतीमाला ने कई फिल्मों में साथ काम किया , जिसमें या दौर (1957), मधुमती (1958), पैग़ाम (1959), गंगा जमुना (1961), लीडर (1964) और सुंघुर्श (1968) शामिल हैं. लेकिन उनकी इस ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री ने ऑफ स्क्रीन रोमांस की अफवाहों को जन्म दिया हालांकि बाद में दोनों ने इस बाद से इनकार कर दिया. (फोटो: IMDb)

लेकिन जल्द ही दोनों के पेशेवर रिश्तों में उस समय दरार आ गई जब दिलीप कुमार की राम और श्याम में वैजयन्ती माला की जगह वहीदा रहमान को ले लिया गया. इस घटना के बाद कई सालों तक दोनों के बीच बात नहीं हुई लेकिन अंत में दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो ने दोनों के मतभेदों के खत्म करवाया. (फोटो: IMDb)

वैजयन्ती माला के करियर की बागडोर उनकी दादी Yadugiri Devi के हाथ में थी, जो राज कपूर को दिलफेंक मानती थीं. लेकिन बावजदू इसके राज कपूर-वैजयन्ती माला के रोमांस की खबरें सुर्खियों में आने लगी. हालांकि वैजयन्ती माला ने अपनी किताब में इस रिश्ते से साफ इनकार किया और इसे राज कपूर के पब्लिसिटी की भूख के कारण इस रोमांस की खबरों के हवा दी. (फोटो: IMDb)

दिव्यंगत एक्टर ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड में वैजयन्ती माला के दावे का खंडन किया. उन्होंने लिखा कि कैसे उनकी मां, कृष्णा कपूर, उस समय उनके साथ घर छोड़कर चली गईं, जब राज कपूर का वैजयन्ती माला के साथ संबंध था. (फोटो: IMDb)

उन्होंने आगे लिखा कि मुझे याद है, जब पापा वैजयन्ती माला के साथ रिश्ते में थे, उस समय मैं अपनी मां के साथ मरीन ड्राइव के नटराज होटल में रहने आ गया था. होटल से हम दो महीने के लिए चित्रकूट के एक अपार्टमेंट में शिफ्ट हो गए. पापा ने वह अपार्टमेंट मां और हमारे लिए खरीदा था. उन्होंने मां को वापस मनाने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन मां तब तक राजी नहीं हुईं जब तक उन्होंने अपनी ज़िंदगी का वह अध्याय ख़त्म नहीं कर दिया.” (फोटो: IMDb)

राज कपूर और वैजयन्ती माला ने साथ में सिर्फ दो फिल्मों में ही काम किया नज़राना (1961) और संगम (1964). 1968 में वैजयन्ती माला ने उस समय सबको चौंका दिया जब उन्होंने कपूर परिवार के फैमिली डॉक्टर, डॉ. चमनलाल बाली से शादी कर ली वो उस समय जब वो अपने फिल्मी करियर के शिखर पर थीं. इसके बाद उन्होंने फिल्मों से संन्यास ले लिया और अपनी पर्सनल लाइफ पर ध्यान केंद्रीत करने लगीं. (फोटो: IMDb)

फिल्मों को अलविदा कहने के बाद वैजयन्ती माला ने अपनी किताब में उन्होंने लिखा, “मैंने अपनी ज़िंदगी का सबसे बुद्धिमानी भरा फैसला लिया, सही समय पर फिल्में छोड़ दीं. मुझे कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि मैंने बेहतरीन लोगों के साथ काम किया.”



