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एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत की मोना अग्रवाल ने कमाल कर दिया. मोना ने 10 मीटर एयर राइफल (एसएच1) प्रतियोगिता में दमदार खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल पर निशाना लगाया. फाइनल में मोना ने अपने हमवतन अवनि लेखरा को पछाड़कर मेडल जीता. इस भारत ने 10 मीटर एयर राइफल में भारत को सोने का तमगा दिलाया.
मोना अग्रवाल ने जीता गोल्ड मेडल
नई दिल्ली: एशियन पैरा गेम्स 2026 में मोना अग्रवाल ने 10 मीटर एयर राइफल (एसएच1) में स्वर्ण पदक अपने नाम किया. मोना फाइनल ने शानदार वापसी करते हुए अपनी हमवतन अवनि लेखरा को पछाड़कर मेडल जीता. पेरिस पैरालंपिक 2024 की कांस्य पदक विजेता मोना ने छठे स्थान से वापसी करते हुए 250.0 अंक के साथ एशियाई पैरा खेलों का रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने दो बार की पैरालंपिक चैंपियन अवनि को महज 0.4 अंक से पछाड़ा. गत चैंपियन के तौर पर उतरीं 24 वर्षीय अवनि को 249.6 अंकों के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा.
अवनि के इस पदक से भारत ने 2028 लॉस एंजिलिस पैरालंपिक के लिए दूसरा कोटा स्थान भी हासिल कर लिया. मोना ने पिछले महीने विश्व निशानेबाजी पैरा स्पोर्ट (डब्ल्यूएसपीएस) चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर पहले ही एक कोटा स्थान हासिल कर लिया था. इस स्पर्धा में दक्षिण कोरिया की युनरी ली ने 227.9 अंक के साथ कांस्य पदक जीता. एसएच1 वर्ग निचले अंगों में विकलांगता वाले निशानेबाजों के लिए है.
क्वालीफिकेशन राउंड में भी मोना हासिल किया था पहला स्थान
जयपुर की इन दोनों निशानेबाजों के बीच मुकाबला 24 शॉट के फाइनल के आखिरी शॉट तक चला. निर्णायक शॉट से पहले मोना के 239.1 अंक थे जबकि अवनि 239.2 अंक के साथ उनसे 0.1 अंक आगे थीं. मोना ने आखिरी शॉट में शानदार 10.8 अंक हासिल किए जबकि अवनि 10.5 अंक ही जुटा सकीं. इस तरह 38 वर्षीय दो बच्चों की मां मोना ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया.
मोना ने क्वालीफिकेशन में भी शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने आठ निशानेबाजों के बीच 629.1 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल करते हुए एशियाई पैरा खेलों का क्वालीफिकेशन रिकॉर्ड बनाया था. कार दुर्घटना के बाद व्हीलचेयर पर बैठकर निशाना लगाने वाली अवनि 626.4 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रही थीं. हालांकि फाइनल की शुरुआत में तस्वीर अलग थी. हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों के स्वर्ण पदक का बचाव करने उतरी अवनि ने 10.8 अंक के साथ शुरुआत की जबकि मोना ने 10.1 अंक हासिल किए.
फाइनल में मोना में की थी दमदार वापसी
पहले पांच शॉट के बाद अवनि 53.2 अंक के साथ आगे थीं. अगले पांच शॉट के बाद भी उन्होंने अपनी बढ़त बनाए रखी और 104.8 अंक तक पहुंच गईं. उस समय मोना 102.9 अंक के साथ छठे स्थान पर थीं. इसके बाद एलिमिनेशन चरण में मुकाबले का रुख बदल गया. अवनि लगातार कुछ कम स्कोर वाले शॉट लगाने लगीं जबकि मोना ने धीरे-धीरे अपनी स्थिति में सुधार किया. इससे मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया. मोना के लिए यह स्वर्ण पदक धीमी शुरुआत के बाद शानदार वापसी का परिणाम रहा. अवनि के लिए यह रजत पदक उनके शानदार करियर में एक और बड़ी उपलब्धि है.
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. वर्तमान में वह नेटवर्क 18 समूह के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हैं और हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में अपनी…
