Lakhimpur Kheri News: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में नेशनल हाईवे-730 पर निर्माण कार्य में भारी लापरवाही की रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई है. छोटी काशी कहे जाने वाले गोला गोकर्णनाथ से लखीमपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित रेलवे ओवरब्रिज पर सड़क के बीचों-बीच अचानक जमीन धंस गई और देखते ही देखते 10 से 12 फीट गहरा जानलेवा गड्ढा बन गया. यह घटना देर रात की है, जब अंधेरे में तेज रफ्तार वाहन इस गड्ढे की चपेट में आकर बड़े हादसे का शिकार हो सकते थे. गनीमत रही कि वक्त रहते एक जागरूक राहगीर की नजर इस पर पड़ गई और उसने तुरंत अपनी शर्ट उतारकर गड्ढे के पास खतरे के निशान के रूप में लगा दी, जिससे कई वाहन चालकों की जान बच गई.
घटना की जानकारी मिलते ही विभागीय अमले में हड़कंप मच गया. भारी फजीहत से बचने के लिए अधिकारियों और ठेकेदार ने रात के अंधेरे में ही आनन-फानन में जेसीबी मशीनें और डंपर मंगवाए और कई डंपर मिट्टी डालकर गड्ढे को पाटने की कवायद शुरू कर दी. हालांकि, इस घटना ने 84 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने इस ओवरब्रिज की गुणवत्ता और विभागीय मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रात के सन्नाटे में देवदूत बना राहगीर, टल गया भयानक सड़क हादसा
गोला गोकर्णनाथ रेलवे ओवरब्रिज पर जब यह गड्ढा हुआ, तब चारों ओर अंधेरा छाया हुआ था. इस रूट पर रात के समय भारी वाहनों और तेज रफ्तार गाड़ियों की लगातार आवाजाही रहती है. 10 से 12 फीट गहरे गड्ढे के सामने मौत बनकर मुंह बाए खड़े होने के बावजूद वहां कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग नहीं थी. उसी दौरान वहां से गुजर रहे एक सजग राहगीर ने जब इस जानलेवा गड्ढे को देखा, तो बिना समय गंवाए मानवीय मिसाल पेश की.
राहगीर ने तुरंत अपने शरीर से शर्ट उतारी और उसे सड़क पर संकेत (वार्निंग साइन) के रूप में लगा दिया, ताकि दूर से आ रही गाड़ियों की लाइट उस पर पड़े और चालक गाड़ी की गति धीमी कर लें. राहगीर की इस त्वरित सूझबूझ के चलते अंधेरे में होने वाला एक बड़ा और भीषण सड़क हादसा टल गया.
4 से 5 डंपर मिट्टी डालकर रातों-रात पाटा गया गड्ढा
मामले की भनक लगते ही सड़क निर्माण से जुड़े अधिकारी और ठेकेदार हरकत में आए. रात में ही मौके पर जेसीबी मशीनें और डंपर बुलाए गए. लगभग चार से पांच डंपर मिट्टी डालकर आनन-फानन में गड्ढे को पाटने का काम शुरू किया गया. फौरी तौर पर प्रशासन ने गड्ढे को भरकर यातायात सुचारू करने का प्रयास तो कर दिया, लेकिन सड़क का एक बड़ा हिस्सा अब भी बुरी तरह धंसा हुआ दिखाई दे रहा है. कुछ समय पूर्व ही इस पुल के तकनीकी एलाइनमेंट में गड़बड़ी और घटिया निर्माण को लेकर आशंका जताई गई थी, जो अब सच साबित होती दिख रही है. 84 करोड़ रुपये की लागत से जनता के पैसों से तैयार किया गया यह ढांचा पहली बड़ी बारिश में ही जवाब देने लगा है.
PWD के JE का तर्क- ‘बारिश से हुआ गड्ढा’
इस पूरे मामले में जब लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) राहुल सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने निर्माण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही या तकनीकी खामी से साफ इनकार कर दिया. जेई राहुल सिंह के अनुसार, पिछले दो-तीन दिनों से इलाके में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पानी जमा हो गया था, जिससे मिट्टी धंसने के कारण यह गड्ढा बन गया.
वहीं दूसरी ओर, निर्माण से जुड़े कुछ लोगों यह दावा करते नजर आए कि कोई बड़ा गड्ढा हुआ ही नहीं था, बल्कि केवल हल्की लाइनिंग या सड़क का थोड़ा सा हिस्सा दबा था. उन्होंने इस सच्चाई को उजागर करने वाली खबरों और वीडियो को ही खारिज करने की हास्यास्पद कोशिश की, जबकि धरातल पर 10-12 फीट गहरे गड्ढे में कई डंपर मिट्टी डालने के दृश्य स्पष्ट रूप से कैमरे में कैद हो चुके थे.
‘अधिकारी ठेकेदार के प्रतिनिधि बनकर कर रहे हैं बचाव’
इस घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है. गोला गोकर्णनाथ के नगर पालिका अध्यक्ष रिंकू शुक्ला ने ओवरब्रिज निर्माण की गुणवत्ता, लेटलतीफी और अधिकारियों की मिलीभगत पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. रिंकू शुक्ला ने कहा, इस रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण को चलते-चलते करीब 10 साल बीत गए. यह समझ से परे है कि टेंडर की एक निश्चित मियाद और अवधि होने के बावजूद इसे बार-बार एक्सटेंशन कैसे मिलता रहा? कभी रेलवे की समस्या तो कभी वन विभाग की अड़चनों का बहाना बनाकर 10 साल खींच दिए गए. ऐसा कौन सा ओवरब्रिज है जिसे बनने में दशक लग जाए? हमने शुरुआत से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर आवाज उठाई थी.



