
मंत्रोच्चार, घंटियों और पूजा-अर्चना के बीच घंटों तक गहरी निद्रा में सोती रही बालिका, श्रद्धालुओं ने माना माँ की दिव्य कृपा का संकेत।
हरिद्वार। सावन के पावन मास में हरिद्वार स्थित दक्षिण काली मंदिर इन दिनों साधना, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभूतियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन, पूजन और आशीर्वाद के लिए पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में आज मंदिर परिसर में घटित एक भाव-विभोर कर देने वाले प्रसंग ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
दक्षिण काली मंदिर में परम पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज अपनी गहन साधना में लीन थे। वातावरण में मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों की ध्वनि गूंज रही थी। इसी दौरान एक नन्ही बालिका सहज भाव से वहां पहुंची और आकर महाराज श्री की गोद में बैठ गई। बालिका कुछ समय तक बिल्कुल शांत भाव से उनकी गोद में बैठी रही।
इस अप्रत्याशित दृश्य को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच भी कौतूहल और भावुकता का वातावरण बन गया। बालिका के सहज और निर्विकार भाव ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। महाराज श्री ने भी इस प्रसंग को अत्यंत आत्मीयता और करुणा के भाव से देखा।
बताया गया कि कुछ समय बाद जब महाराज श्री को यह आध्यात्मिक अनुभूति हुई कि यह प्रसंग माँ दक्षिण काली की किसी दिव्य बाल-लीला का संकेत हो सकता है, तो उन्होंने बालिका के विश्राम की व्यवस्था मंदिर परिसर में ही कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद जो दृश्य सामने आया, उसने श्रद्धालुओं को और अधिक भाव-विभोर कर दिया। मंदिर में लगातार मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और पूजा-अर्चना की अन्य धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं, लेकिन इसके बावजूद वह नन्ही बालिका घंटों तक बेहद शांत और गहरी निद्रा में सोती रही।
मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस पूरे प्रसंग को श्रद्धा और भक्ति की दृष्टि से देखा। कई भक्तों का मानना रहा कि माँ की उपासना के केंद्र में इस प्रकार एक बालिका का सहज रूप से आना और फिर मंदिर के आध्यात्मिक वातावरण में उसका शांत भाव से सोना, उनके लिए एक अत्यंत भावुक और स्मरणीय अनुभव है।
बाल रूप में माँ की लीला मानकर भावुक हुए श्रद्धालु
सनातन परंपरा में देवी के विभिन्न स्वरूपों की उपासना की जाती है। भक्तों की आस्था में माँ कभी शक्ति के विराट स्वरूप में तो कभी सरल, सहज और बाल रूप में भी अनुभूत होती हैं। इसी आध्यात्मिक भावभूमि में दक्षिण काली मंदिर का यह प्रसंग श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में साधना और पूजा के दौरान घटित ऐसे सहज प्रसंग उनके भीतर भक्ति, विश्वास और आध्यात्मिक भाव को और गहरा करते हैं। उनके लिए यह घटना किसी चमत्कार को प्रमाणित करने का विषय नहीं, बल्कि माँ के प्रति उनकी व्यक्तिगत आस्था और भावनात्मक अनुभूति का हिस्सा है।
साधना और भक्ति का केंद्र बना दक्षिण काली मंदिर
सावन के पावन अवसर पर दक्षिण काली मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों और साधना का विशेष वातावरण बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर माँ के दर्शन कर रहे हैं और आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की साधना एवं आशीर्वाद से आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।
मंदिर परिसर में घटित यह बालिका वाला प्रसंग भी श्रद्धालुओं के लिए एक भावनात्मक स्मृति बन गया है। भक्त इसे अपनी-अपनी श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुभूति के अनुसार देख रहे हैं। किसी के लिए यह माँ की बाल-लीला है तो किसी के लिए मंदिर की पवित्रता और साधना के वातावरण में घटित एक सहज, सुंदर और भावपूर्ण क्षण।
आस्था व्यक्तिगत अनुभूति का विषय है। ऐसे प्रसंगों का महत्व भक्तों के लिए उनके विश्वास, भावना और आध्यात्मिक दृष्टिकोण में निहित होता है। दक्षिण काली मंदिर में सामने आए इस दृश्य ने एक बार फिर यह अनुभूति कराई कि भक्ति केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि भाव और विश्वास का भी नाम है।
लेखक — शांतनु शुक्ल
धार्मिक मामलों के विशेषज्ञ एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रभारी
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज
