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अधिकारियों ने बताया कि चूंकि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और केंद्र तीनों जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें हैं, इसलिए केंद्र ने दोनों राज्यों को मामले में तकनीकी परामर्श जारी रखने का सुझाव दिया है।
केंद्र सरकार की सक्रिय मध्यस्थता के बाद ओडिशा और छत्तीसगढ़ ने दशक पुराने महानदी जल विवाद (Mahanadi Water Dispute) का अगले 3 से 4 महीनों के भीतर सौहार्दपूर्ण और सर्वसम्मत समाधान निकालने पर सहमति व्यक्त की है। बीते गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भाग लिया। बैठक के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि इस विवाद को दिवाली से पहले सुलझा लिया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि चूंकि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और केंद्र तीनों जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें हैं, इसलिए केंद्र ने दोनों राज्यों को मामले में तकनीकी परामर्श जारी रखने का सुझाव दिया है। केंद्र ने संवाद के माध्यम से सुलझाए गए अंतर-राज्यीय जल विवादों का उदाहरण देते हुए इस विवाद को भी आम सहमति से सुलझाने पर जोर दिया। केंद्र ने जिन विवादों का जिक्र किया
आपको बता दें कि महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने 20 अप्रैल के अपने आदेश में कहा था कि यदि दोनों राज्य निपटारे के फॉर्मूले को अंतिम रूप देने में विफल रहते हैं तो न्यायाधिकरण मेरिट के आधार पर फैसला सुनाएगा।
इस बैठक के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक्स पर लिखा, “ओडिशा का रुख मजबूती से रखा गया, जिसमें हमारे लोगों के अधिकारों, हमारे किसानों के हितों और राज्य के जल संसाधनों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया। हम दोनों राज्यों के बीच रचनात्मक संवाद, पारस्परिक सहयोग और सद्भाव के माध्यम से एक सौहार्दपूर्ण, न्यायसंगत और स्थायी समाधान हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” वहीं, सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने ओडिशा की चिंताओं को सकारात्मक रूप से लिया है और तकनीकी विवरणों को अंतिम रूप देने के लिए आगे भी बैठकें आयोजित की जाएंगी। संयुक्त तकनीकी समिति पहले ही कई दौर की बातचीत कर चुकी है और कई तकनीकी मुद्दों पर सहमति बना चुकी है।
क्या है महानदी जल विवाद?
ओडिशा और छत्तीसगढ़ 2016 से महानदी के पानी को लेकर आमने-सामने हैं। निचले तटीय राज्य के रूप में ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ ने नदी पर एकतरफा रूप से कम से कम 8 बैराजों का निर्माण किया है, जिससे मॉनसून के बाद ओडिशा में पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। वहीं, छत्तीसगढ़ का तर्क रहा है कि राज्य में नदी का बड़ा जलग्रहण क्षेत्र होने के कारण उसे महानदी के पानी का उपयोग करने का पूरा अधिकार है।
कानूनी लड़ाई से समझौते तक का सफर
2016 में केंद्र ने बातचीत से समाधान निकालने का प्रयास किया था, लेकिन ओडिशा की तत्कालीन बीजेडी (BJD) सरकार ने कानूनी रास्ता अपनाया और ट्रिब्यूनल के गठन के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इसके बाद शीर्ष अदालत के निर्देश पर केंद्र ने मार्च 2018 में ट्रिब्यूनल का गठन किया था। वर्ष 2024 में ओडिशा में बीजेडी के 24 साल के शासन के अंत के बाद भाजपा सत्ता में आई, जिसके बाद राज्य ने परस्पर लाभकारी समझौते की दिशा में कदम बढ़ाए और ट्रिब्यूनल को भी इस संबंध में सूचित किया।
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