मध्य प्रदेश के हरदा जिले के दुलिया गांव निवासी दो सगे भाई डॉ. अंकुर पारे और डॉ. अम्बर पारे का कहना है कि साल 2005 में वाराणसी के ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर ब्रह्मलीन योगीराज जमुना प्रसाद चतुर्वेदी से प्राप्त गुरु-दीक्षा उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई।
मध्य प्रदेश के हरदा जिले के दुलिया गांव निवासी दो सगे भाई डॉ. अंकुर पारे और डॉ. अम्बर पारे का कहना है कि वर्ष 2005 में वाराणसी के ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर ब्रह्मलीन योगीराज जमुना प्रसाद चतुर्वेदी से प्राप्त गुरु-दीक्षा उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई। उनका दावा है कि गुरु से मिले संस्कारों और मार्गदर्शन ने न केवल उनकी सोच बदली, बल्कि समाजसेवा और अपने-अपने कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी।
कैसे बदली दोनों भाइयों की जिंदगी
दोनों भाइयों के अनुसार, ब्रह्मलीन योगीराज जमुना प्रसाद चतुर्वेदी महायोगी महावतार बाबाजी की गुरु परंपरा से जुड़े थे। उन्हें आयुर्वेद, योग, हठयोग, प्राणायाम, मंत्र विज्ञान, ज्योतिष और जड़ी-बूटी विज्ञान का गहन ज्ञान था। वे अपने शिष्यों को आध्यात्मिक साधना के साथ अनुशासन, सेवा और भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को जीवन में अपनाने की शिक्षा देते थे। उनका मानना था कि शिक्षा और ज्ञान का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी बनना भी है।
डॉ. अंकुर पारे ने गुरु-दीक्षा के बाद शोध, लेखन, सामाजिक अध्ययन और हर्बल संपदा के संरक्षण और प्रसार के क्षेत्र में काम किया। वहीं डॉ. अम्बर पारे ने आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक स्वास्थ्य और जन-जागरूकता को अपने कार्य का प्रमुख आधार बनाया। दोनों भाइयों का कहना है कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान का श्रेय अपने गुरु से मिले संस्कारों और प्रेरणा को जाता है।
गुरु परंपरा को आगे बढ़ाते हुए योगीराज जमुना प्रसाद चतुर्वेदी के पुत्र पंडित हेमचंद चतुर्वेदी (भैया महाराज) वर्तमान में मंत्र विज्ञान, वैदिक हवन-अनुष्ठान और आयुर्वेद के क्षेत्र में लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनके माध्यम से अनेक लोग आध्यात्मिक और वैदिक परंपराओं से जुड़ रहे हैं।
डॉ. अंकुर पारे और डॉ. अम्बर पारे का कहना है कि गुरु-शिष्य परंपरा केवल आध्यात्मिक संबंध नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का आधार भी है। उनके अनुसार, वर्ष 2005 में दशाश्वमेध घाट पर मिली गुरु-दीक्षा आज भी उनके जीवन और कार्यों की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी हुई है।



