
ब्यूरो रिपोर्ट हरिद्वार।
दक्षिण काली मंदिर बना शिवभक्ति और साधना का प्रमुख केंद्र देश-विदेश से प्रत्यक्ष और ऑनलाइन जुड़ रहे श्रद्धालु।
हरिद्वार। सावन के पावन महीने में हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध दक्षिण काली मंदिर इन दिनों श्रद्धा, साधना और शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन के प्रथम सोमवार से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की कठोर साधना के दर्शन कर रहे हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। वहीं देश-विदेश में रहने वाले अनेक श्रद्धालु ऑनलाइन माध्यमों से रुद्राभिषेक और साधना से जुड़कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज सावन मास में प्रतिदिन लगभग 22 घंटे तक एक ही आसन पर बैठकर भगवान शिव की आराधना, जप, ध्यान और रुद्राभिषेक में लीन रहते हैं। उनकी यह कठिन साधना श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण और आध्यात्मिक प्रेरणा का विषय बनी हुई है। साधना के प्रति उनका समर्पण, अनुशासन और अटूट निष्ठा श्रद्धालुओं को शिवभक्ति की ओर प्रेरित कर रही है। साधना के दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु दक्षिण काली मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु महाराज श्री की साधना के दर्शन कर स्वयं को आध्यात्मिक रूप से धन्य अनुभव कर रहे हैं। भक्तों का कहना है कि सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना के बीच महाराज श्री की तपस्या और साधना को देखना उनके लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव है।
श्रद्धालुओं के अनुसार, महाराज श्री की साधना उन्हें शिवभक्ति, आत्मिक शांति, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देती है। यही कारण है कि सावन के प्रत्येक दिन दक्षिण काली मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
देश-विदेश से ऑनलाइन भी जुड़ रहे भक्त दक्षिण काली मंदिर में चल रही साधना का प्रभाव केवल हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु भी ऑनलाइन माध्यमों से मंदिर की गतिविधियों, रुद्राभिषेक और साधना से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से हरिद्वार नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भगवान शिव के रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़कर अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। इससे सावन के दौरान दक्षिण काली मंदिर से जुड़ने वाले श्रद्धालुओं का दायरा और व्यापक हुआ है। सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व सनातन परंपरा में सावन मास को भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करने की विशेष धार्मिक मान्यता है।
इसी आध्यात्मिक वातावरण के बीच आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की कठोर साधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लंबे समय तक एक ही आसन पर रहकर जप, ध्यान और आराधना में लीन रहना उनके साधना-जीवन के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
साधना, तप और शिवभक्ति का केंद्र बना दक्षिण काली मंदिर
सावन के पावन अवसर पर दक्षिण काली मंदिर का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। मंदिर परिसर में भगवान शिव की आराधना, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव हो रहा है।
महाराज श्री की साधना को देखने और उनके आशीर्वाद के लिए पहुंच रहे भक्तों का कहना है कि यह केवल किसी धार्मिक अनुष्ठान का दर्शन नहीं, बल्कि तप, त्याग, अनुशासन और शिवभक्ति की जीवंत अनुभूति है।
सावन के इस पवित्र मास में दक्षिण काली मंदिर एक ऐसे आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां श्रद्धालुओं को भगवान शिव की आराधना के साथ साधना और तप की एक विरल परंपरा के दर्शन हो रहे हैं। प्रत्यक्ष रूप से मंदिर पहुंचने वाले भक्त हों या ऑनलाइन माध्यम से जुड़ने वाले श्रद्धालु—सभी इस आध्यात्मिक वातावरण से जुड़कर स्वयं को भगवान शिव की भक्ति में समर्पित करने का प्रयास कर रहे हैं।
शान्तनु शुक्ल
धार्मिक मामलों के विशेषज्ञ एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज।
