जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार को करीब 19 हजार वोटों से हराया और पार्टी को पहली चुनावी सफलता दिलाई। साथ ही, उन्होंने लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार नाम वाले दो उम्मीदवारों को भी मामूली वोटों पर सिमटा दिया।
बिहार की राजनीति में सोमवार को एक ऐसा दिन दर्ज हो गया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक रहेगी। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बंपर मतों से जीत हासिल की। उन्होंने न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के मजबूत गढ़ पर कब्जा जमाया, बल्कि एक ही चुनाव में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार नाम वाले दो निर्दलीय उम्मीदवारों को भी बुरी तरह शिकस्त दी।
प्रशांक किशोर को कुल 64,151 वोट मिले। बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 वोट मिले, जबकि राजद की रेखा कुमारी 14,273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह रहा कि लालू प्रसाद यादव नाम वाले निर्दलीय उम्मीदवार को महज 81 वोट और नीतीश कुमार नाम वाले स्वतंत्र उम्मीदवार को सिर्फ 149 वोट ही हासिल कर सके। इस तरह प्रशांत किशोर ने तकनीकी रूप से बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के नामधारी उम्मीदवारों को भी एक साथ हरा दिया।
पीके का शुरू से बना रह दबदबा
प्रशांत किशोर शुरू से लेकर आखिरी राउंड तक अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी नीरज कुमार पर लगातार अच्छी बढ़त बनाए रहे। दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम वाले दोनों निर्दलीय उम्मीदवार किसी भी चरण में उन्हें परेशान नहीं कर सके। 49 वर्षीय प्रशांत किशोर ने नीरज कुमार को 19324 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस जीत के साथ जन सुराज पार्टी को अपनी पहली चुनावी सफलता मिली और बीजेपी की बांकीपुर पर तीन दशक से चली आ रही मजबूत पकड़ टूट गई। बांकीपुर लंबे समय से बीजेपी का किला माना जाता रहा है।
नितिन नवीन के इस्तीफे के कारण खाली हुआ था सीट
बता दें कि यह उपचुनाव बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उनके इस्तीफे के कारण हुआ था। सीट खाली होने के बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की। बताया जा रहा है कि पीके की इस जीत के पीछे जमीनी काम था। उन्होंने पब्लिक मीटिंग्स का सिलसिला चलाया, घर-घर जाकर प्रचार किया और पूरे चुनाव क्षेत्र में बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं व मतदाताओं को संगठित किया।
पूरे चुनावी अभियान के दौरान प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को ‘सम्राट चौधरी सरकार पर जनमत संग्रह’ के रूप में पेश किया। उन्होंने रोजगार, शिक्षा, सुशासन और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा। पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं और जेन-जी युवाओं को सीधे संपर्क बनाते हुए उन्होंने पारंपरिक चुनावी रैलियों से अलग शैली में अभियान चलाया।
बीजेपी की ओर से 40 स्टार प्रचारक
दूसरी ओर बीजेपी ने बांकीपुर को प्रतिष्ठा का मुकाबला माना। पार्टी ने सीट बचाने के लिए करीब 40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा और हजारों कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया। बड़े नेताओं की रैलियां, रोड शो और घर-घर संपर्क अभियान चलाया गया। फिर भी अंत में प्रशांत किशोर की जमीनी मेहनत और मुद्दा-आधारित प्रचार के सामने बीजेपी की यह कोशिश कामयाब नहीं हो सकी।



