बिहार विधानसभा की बांकीपुर सीट पर उपचुनाव में मतदान प्रतिशत के पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। बांकीपुर के मतदाता वोट करने बूथ तक नहीं आए। वोटिंग प्रतिशत महज 34.30 प्रतिशत (शाम 6 बजे तक का आंकड़ा) पर सिमट गया।
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में मतदान प्रतिशत गिरने के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए। गुरुवार (30 जुलाई 2026) को बांकीपुर में शाम 6 बजे तक महज 34.30 प्रतिशत मतदान हुआ। पटना शहर की बांकीपुर सीट वैसे बिहार में सबसे कम मतदान प्रतिशत वाले विधानसभा क्षेत्रों में शुमार है। हालांकि, इस बार यहां अब तक का सबसे कम वोटिंग पर्सेंटेज दर्ज किया गया। इससे पहले साल 2020 के विधानसभा चुनाव में बांकीपुर में सबसे कम 35.92 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। बांकीपुर उपचुनाव में लोगों के बूथ तक आकर वोट नहीं करने के पीछे की कई वजहें सामने आई हैं।
बीते एक महीने से पटना शहर की इस सीट पर उपचुनाव के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार और नेता वोटरों को लुभाने की भरसक कोशिश करते रहे। इसके बावजूद बांकीपुर की जनता बूथ तक वोट डालने नहीं पहुंच पाई। बांकीपुर सीट पर कम मतदान के क्या कारण हैं और किस पार्टी या कैंडिडेट को इसका फायदा मिल सकता है, इस पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
बांकीपुर में मतदान का पूरा इतिहास
बांकीपुर विधानसभा 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह पटना पश्चिम विधानसभा हुआ करती थी। बांकीपुर सीट बनने के बाद सबसे पहली बार 2010 में चुनाव हुआ, उस समय 36.82 प्रतिशत मतदान हुआ था। साल 2015 के चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 40.25 फीसदी तक पहुंच गया।
हालांकि, 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बांकीपुर में वोटिंग प्रतिशत फिर से गिर गया, उस समय 35.92 प्रतिशत मतदान ही हुआ। पिछले यानी 2025 के विधानसभा चुनाव में बांकीपुर सीट पर वोटिंग में तेजी तो आई लेकिन आंकड़ा 41.1 प्रतिशत पर जाकर अटक गया। अब उपचुनाव में यह फिर से गिरकर 35 फीसदी से नीचे चला गया है, जो कि अब तक का सबसे कम वोटिंग प्रतिशत है।
बांकीपुर उपचुनाव में कम वोटिंग प्रतिशत के क्या कारण?
पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले युवा मतदाताओं में उपचुनाव में मतदान का क्रेज कम दिखा। खासकर दूसरे राज्य या शहरों में रहकर पढ़ाई या रोजगार कर रहे अधिकतर युवा वोटर उपचुनाव में वोट डालने घर नहीं आए। दर्जन भर अभिभावकों ने हिन्दुस्तान संवाददाता से बातचीत में बताया कि नौकरी और पढ़ाई भी जरूरी है। उनका कहना है कि दूसरे शहरों से महंगा हवाई किराया खर्च कर सिर्फ वोट डालने के लिए पटना कौन आए?
स्थानीय लोगों से बातचीत में कम मतदान की एक और वजह सामने आई। कई लोगों का कहना है कि बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम से बिहार की सियासी स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है। इसलिए मतदाताओं की रुचि कम दिख रही है। इस इलाके में जो युवा रहते हैं, उनमें अधिकतर दूसरे जिलों के वोटर हैं। कम मतदान की बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है।
नीरज, पीके, रेखा समेत 25 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला 3 अगस्त को
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई बांकीपुर सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान पूरा हो चुका है। भाजपा कैंडिडेट नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर और आरजेडी की रेखा गुप्ता समेत 25 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है। 3 अगस्त को मतगणना के बाद बांकीपुर सीट का रिजल्ट जारी होगा।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर कब कितना वोटिंग प्रतिशत रहा-
- 2010 विधानसभा चुनाव – 36.82 प्रतिशत
- 2015 विधानसभा चुनाव – 40.25 प्रतिशत
- 2020 विधानसभा चुनाव – 35.92 प्रतिशत
- 2025 विधानसभा चुनाव – 41.10 प्रतिशत
- 2026 उपचुनाव – 34.30 प्रतिशत (शाम 6 बजे तक)

