नीट प्रदर्शन के दौरान उपद्रव के रोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लिए जाएंगे और जिन प्रदर्शनकारियों को सरकारी संपत्ति के नुकसान या पुलिस पर हमले के आरोप में जेल भेज दिया गया है उन्हें रिहा किया जाएगा।
नीट पेपर लीक और दिल्ली में आंदोलनकारियों की पिटाई के विरोध में प्रदर्शन के दौरान उपद्रव और तोड़फोड़ के आरोपियों पर सम्राट चौधरी सरकार ने बड़ी मेहरबानी दिखाई है। इस प्रकरण के सभी आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लिए जाएंगे और जिन प्रदर्शनकारियों को सरकारी संपत्ति के नुकसान या पुलिस पर हमले के आरोप में जेल भेज दिया गया है उन्हें रिहा किया जाएगा। सरकार ने भरोसा दिया है कि इन मामलों में भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।सरकार के आदेश पर गृह विभाग ने इस आशय का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि राज्य के विभिन्न जिलों में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर बिहार सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि कट ऑफ समय सीमा तक छात्रों को राहत दी जाएगी। उन्हें कानूनी तौर पर कोई परेशानी नहीं होगी। कहा गया है दिनांक 26 जुलाई की शाम छह बजे से पहले तक बिहार के किसी भी हिस्से में इस विरोध-प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों के विरूद्ध सरकार कोई भी दंडात्मक, प्रतिशोधात्मक अथवा प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी।
नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के बाद पटना में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ। उसके बाद मुजफ्फरपुर, भागलपुर, बेगूसराय, सीतामढ़ी, दरभंगा, गोपालगंज, सीवान समेत कई जिलों में हिंसात्मक प्रदर्शन हुए। सरकरी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और उपद्रव मचाने के आरोप में विभिन्न जिलों से कम से कम 355 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया जिनमें लालू यादव के बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव भी शामिल हैं। यह आंकड़ा पुलिस मुख्यालय की ओर से ही जारी किया गया है। सोमवार को पटना सिविल कोर्ट में तेज प्रताप यादव की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया। आदेश में कहा गया है कि इन्हें जल्द मुक्त कर दिया जाएगा।
आदेश में कहा गया है कि जिन आरोपियों को नोटिस भेजा गया है उन्हें निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार ने आंदोलन में शामिल छात्रों और आम लोगों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या बदले की भावना से की जाने वाली कानूनी कार्रवाई न करने का भरोसा दिया है। सरकार के इस कदम से उन हजारों छात्रों और युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी, जिन पर प्रदर्शनों के दौरान कानूनी मुकदमे दर्ज किए गए थे।
नीट प्रदर्शन के दौरान कई जिलों में पुलिस वाहनों में तोड़ फोड़ की गई। सीतामढ़ी में एसपी पर हमला कर दिया गया जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। मुजफ्फरपुर में सरकारी बैनर पोस्टर को नष्ट कर दिया गया। बेगूसराय में समाहणालय परिसर में पत्थरबाजी की गई है। कई जिलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं।



