बालाघाट में अलग-अलग कारणों से पिछले तीन महीनों में 30 आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद कॉकरोच पार्टी ने इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया था।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बीते तीन महीनों के दौरान करीब 30 आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद यह मामला पूरे प्रदेश में गर्माया हुआ है। इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे का जिक्र करते हुए बालाघाट आने की बात कही थी और कहा था कि वे फिलहाल उसी के रास्ते में ही हैं। शनिवार की सुबह जब अभिजीत दिपके बालाघाट के एक गांव में पहुंचे तो वहां उनका अनुभव कुछ अच्छा नहीं रहा। दरअसल वहां पहुंचते ही पहले से मौजूद स्थानीय पत्रकारों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और उन पर सवालों की बौछार कर दी। कॉकरोच पार्टी के प्रमुख से उन्होंने इतनी देरी से बालाघाट आने के बारे में सवाल पूछा, जिसके बाद दिपके देरी से आने की बात मानी और अपनी इस गलती के लिए वे पत्रकारों से क्षमा (माफी) मांगते हुए नजर आए।
इस घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें कॉकरोच पार्टी के प्रमुख खुद गाड़ी चलाकर बालाघाट पहुंचते दिखाई दे रहे हैं, इस दौरान वे ही ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए नजर आए। पत्रकारों को सड़क पर देखते ही दिपके वाहन की गति बेहद धीमी करते हुए उसे रोक लेते हैं, जिसके बाद एक महिला रिपोर्टर उनकी तरफ बढ़ते हुए बेहद आक्रामक अंदाज में कहती है ‘देखो ये आ गए लाशों पर राजनीति करने, अब फुरसत मिली आपको सुध लेने की। कितना समय हो चुका है। अब आप आए हैं अपनी संवेदनाएं जताने के लिए।’ इसी बीच एक अन्य पुरुष पत्रकार दिपके से कहता है, ‘देरी कर दी भैया आपने आने में, इतने दिन हो चुके हैं, अब आप पधारे हैं।’
इसके जवाब में दिपके वहां मौजूद पत्रकारों से कहते हैं, ‘मैं माफी चाहता हूं, मैं काफी देर से आया हूं।’ इसके बाद जब वहां मौजूद यूट्यूबर पत्रकारों ने एकबार फिर दिपके को घेरने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, ‘नहीं-नहीं मेरी बात सुनिए, मैं माफी चाहता हूं।’ इसके बाद जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि इतने दिनों बाद आप यहां आए क्यों हैं तो दिपके ने अच्छा-अच्छा कहते हुए उसके सवाल को टाल दिया और अपनी गाड़ी आगे बढ़ा ली।
इससे पिछली रात को दिपके ने सोशल मीडिया पर अपने बालाघाट पहुंचने की जानकारी दी थी। अपनी पोस्ट में दिपके ने लिखा था, ‘मैं मध्य प्रदेश के बालाघाट जा रहा हूं, जहां 30 आदिवासी बच्चों की मौत हो गई है। मुझे एक आदिवासी एक्टिविस्ट से जानकारी मिली है कि MP पुलिस अब उन आदिवासी छात्रों को हिरासत में लेने की कोशिश कर रही है जो मेरे दौरे का इंतजाम कर रहे हैं।’
अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, ‘ऐसा क्यों है कि हमेशा भाजपा-शासित राज्य ही सच सामने आने से इतना डरते हैं?’ दिपके की इसी पोस्ट को शेयर करते हुए पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने लिखा, ‘दिपके एंड कंपनी भाजपा के इन गुंडों का घमंड तोड़ेगी। अगर वे बातचीत नहीं कर सकते, तो यह उनकी समस्या है, हमारी नहीं।’
इसी मुद्दे को उठाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने लिखा था, ‘सरकार की लापरवाही की वजह से 30 आदिवासी बच्चों की जान चली गई। अब वही सरकार आवाज़ उठाने वाले आदिवासी छात्रों को हिरासत में ले रही है। अगर सरकार ने आदिवासी बच्चों की भलाई के लिए पहले से ही सक्रिय कदम उठाए होते, तो हमें आज यहाँ नहीं आना पड़ता। यह बेहद शर्मनाक है।’
बता दें कि अभिजीत दिपके बालाघाट इसलिए आए हैं, क्योंकि बीते तीन महीनों के दौरान यहां पर लगभग तीस आदिवासी बच्चों की मौत अलग-अलग कारणों से हो चुकी है। जांच के दौरान बच्चों की मौत की मुख्य वजह घातक बीमारी के साथ ही पीने के पानी, कुपोषण और समय पर इलाज नहीं मिलने को बताया गया। जिसके बाद इस मुद्दे को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया के जरिए उठाया था।
5 सितंबर को शेयर की अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा था, ‘मध्य प्रदेश के बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मृत्यु की खबर बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक है। इस घातक बीमारी के साथ पीने के पानी, पोषण, और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों की जान ले रहा है।’
इसे सरकार की पूर्ण विफलता बताते हुए उन्होंने सीएम से इसका समाधान करने की मांग की थी। उन्होंने लिखा था, ‘ये सरकार की पूर्ण विफलता है। मुख्यमंत्री स्वयं इसका समाधान करें और क्षेत्र में तत्काल जांच, इलाज और राहत उपलब्ध कराएं। बच्चों की जिंदगी से समझौता नहीं हो सकता।’ इसके साथ ही गांधी ने एक अखबार की खबर की कतरन भी पोस्ट की थी जिसमें बालाघाट क्षेत्र में आदिवासी बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाये गए थे।
उधर इसी मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि बच्चों को पर्याप्त उपचार नही मिल रहा है और 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है।



