कोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करते हुए निर्देश दिया है कि चार्जशीट दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर इन मामलों का निपटारा करने की हर संभव कोशिश की जाए।
मध्यप्र देश हाई कोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक और उनसे जुड़ी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई के लिए चार स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि चार्जशीट दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर इन मामलों का निपटारा करने का हरसंभव प्रयास किया जाए।
यह फैसला परीक्षा में गड़बड़ियों, विखासकर नीट-यूजी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आश्वासन दिए जाने के दो दिन बाद आया है। मई में नीट-यूजी पेपर लीक होने के बाद छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे और अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की थी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने शुक्रवार रात जारी आदेश में चार जिलों के जिला और अपर सत्र न्यायालयों को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024’ और उससे संबंधित अपराधों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित किया।
सीएम मोहन यादव ने की थी घोषणा
इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में पेपर लीक के मामलों की तुरंत सुनवाई, शीघ्र न्याय और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए खास फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाने की घोषणा की थी।
सरकारी बयान के अनुसार इन अदालतों में भोपाल में 18वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण पटेल, ग्वालियर में आठवें जिला और अपर सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड, जबलपुर में 27वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार सेहलाम तथा इंदौर में 26वें जिला और अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह को नामित किया गया है।
बयान में कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य लोक परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना और ऐसे मामलों का त्वरित और प्रभावी न्यायिक निपटारा सुनिश्चित करना है।



