
ब्यूरो रिपोर्ट सोनभद्र।
चोपन/सोनभद्र। जनपद में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं ने एक बार फिर यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां लेकर सड़कों पर दौड़ रहे टेम्पू यूटिलिटी वाहन, पिकअप और अन्य छोटे बड़े व्यावसायिक वाहन आम लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। इसके बावजूद ऐसे वाहनों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
हाल ही में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे लोगों से भरे एक यूटिलिटी वाहन की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। तस्वीर में वाहन के अंदर और पीछे बड़ी संख्या में लोग बैठे दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर ने जिले में सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है।
ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जान जोखिम में डालकर सफर।

सोनभद्र के दूरस्थ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग मजबूरी में ओवरलोड वाहनों का सहारा लेते हैं शादी-विवाह, सामाजिक कार्यक्रमों और बाजार आने-जाने के दौरान लोग पिकअप, यूटिलिटी वाहनों और मालवाहक गाड़ियों में यात्रा करते देखे जाते हैं। कई बार एक वाहन में उसकी क्षमता से दोगुने-तीन गुने तक लोग बैठा दिए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वाहनों में सफर करने से दुर्घटना की स्थिति और जान-माल का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। वाहन का संतुलन बिगड़ने, ब्रेक फेल होने या चालक के नियंत्रण खोने पर बड़ी हो सकती है।
चोपन बैरियर पर तैनाती, फिर भी नहीं रुक रहे ओवरलोड वाहन।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चोपन बैरियर समेत कई प्रमुख चौराहों और मार्गों पर यातायात पुलिस तथा स्थानीय पुलिस की नियमित तैनाती रहती है। इसके बावजूद क्षमता से अधिक सवारियां लेकर चलने वाले वाहन आसानी से निकल जाते हैं। लोगों का आरोप है कि सड़क पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर नजर नहीं आती।
कई नागरिकों का कहना है कि अक्सर यातायात अभियान के दौरान दोपहिया वाहन चालकों के हेलमेट और दस्तावेजों की जांच पर ज्यादा जोर दिया जाता है, जबकि दर्जनों यात्रियों की जान जोखिम में डालकर चल रहे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कम देखने को मिलती है।
लगातार हादसों के बाद भी नहीं जाग रहा है सिस्टम।
जनपद में पिछले कुछ महीनों के दौरान कई सड़क दुर्घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें अनेक लोगों की जान गई है और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद ओवरलोडिंग की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। सड़क सुरक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि हादसों के पीछे तेज रफ्तार, लापरवाही और ओवरलोडिंग प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी नियमित रूप से सड़कों पर मौजूद रहते हैं, तो फिर ओवरलोड वाहन कैसे बेखौफ होकर संचालन कर रहे हैं। यदि किसी बड़े हादसे में कई लोगों की जान चली जाती है तो उसकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी।
जागरूकता और कार्रवाई दोनों की जरूरत।
सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोडिंग के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात नियमों के प्रति व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि लोग स्वयं भी ऐसे जोखिम भरे सफर से बच सकें।
लोगों का कहना है कि केवल चालान काटने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि अवैध रूप से सवारी ढोने वाले वाहनों के संचालन पर प्रभावी रोक लगानी होगी। साथ ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा ताकि ग्रामीणों को मजबूरी में जान जोखिम में डालकर यात्रा न करनी पड़े।
बड़ा सवाल–क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस और प्रभावी कार्रवाई जल्द देखने को मिलेगी? यह सवाल आज सोनभद्र की सड़कों पर सफर करने वाले हर नागरिक के मन में उठ रहा है। ओवरलोड वाहनों पर समय रहते लगाम नहीं लगी तो आने वाले दिनों में दुर्घटनाओं का आंकड़ा और भयावह रूप ले सकता है।