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Gorakhpur’s Gandhi Ashram is an example of patriotism, with a unique demand for the tricolor flag before January 26th or August 15th.

admin by admin
January 25, 2026
in उत्तर प्रदेश
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Gorakhpur’s Gandhi Ashram is an example of patriotism, with a unique demand for the tricolor flag before January 26th or August 15th.


Last Updated:January 25, 2026, 19:04 IST

Republic Day : 26 जनवरी गणतंत्र दिवस से पहले गोरखपुर का गांधी आश्रम चर्चा में है. यहां तिरंगा केवल कपड़ा नहीं बल्कि सम्मान और नियमों का प्रतीक है. फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के अनुरूप तैयार होने वाले झंडे सरकारी दफ्तरों और स्कूलों की पहली पसंद हैं. महीनों पहले शुरू होने वाली तैयारी देशभक्ति की सच्ची तस्वीर पेश करती है.

गोरखपुर : पूरा देश 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जुटा हुआ है. परेड. झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम हर जगह चर्चा में हैं. लेकिन एक सवाल अक्सर अनदेखा रह जाता है कि वह तिरंगा आखिर बनता कहां है जो हर स्कूल. हर सरकारी दफ्तर और हर चौराहे पर शान से लहराता है. इस सवाल का जवाब गोरखपुर का गांधी आश्रम देता है. जहां देशभक्ति भावनाओं से आगे बढ़कर अनुशासन और नियमों के साथ आकार लेती है.

खादी से आगे तिरंगे की पहचान
गोरखपुर का गांधी आश्रम केवल खादी और सूती कपड़ों की बिक्री का केंद्र नहीं है. बल्कि यह वह स्थान है जहां भारतीय राष्ट्रीय ध्वज पूरी गरिमा और निर्धारित मानकों के साथ तैयार किया जाता है. यहां बनने वाला हर तिरंगा फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के अनुरूप होता है. रंगों की गहराई. कपड़े की गुणवत्ता और ध्वज का अनुपात हर स्तर पर जांचा जाता है.

संस्कारों की कार्यशाला है गांधी आश्रम
गांधी आश्रम में तिरंगा बनाना सामान्य सिलाई का काम नहीं माना जाता. यहां काम करने वाले कारीगर इसे राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान से जोड़कर देखते हैं. आश्रम प्रबंधन के अनुसार. झंडे के कपड़े के चयन से लेकर कटिंग और सिलाई तक हर प्रक्रिया में फ्लैग कोड का सख्ती से पालन किया जाता है. यही कारण है कि सरकारी और शैक्षणिक संस्थान खुले बाजार के बजाय गांधी आश्रम के तिरंगे को प्राथमिकता देते हैं.

बाजार से अलग भरोसे की पहचान
आजकल बाजार में हर जगह तिरंगे उपलब्ध हैं. लेकिन गांधी आश्रम के झंडों पर लोगों का भरोसा अलग है. खुले बाजार में बिकने वाले कई झंडे न तो सही अनुपात में होते हैं और न ही तय मानकों पर खरे उतरते हैं. इसके विपरीत गांधी आश्रम में मिलने वाले तिरंगों के पैकेट पर उनका साइज. अनुपात और जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होती है.

महीनों पहले शुरू होती है तैयारी
गांधी आश्रम में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस की तैयारी अंतिम समय पर नहीं की जाती. स्कूलों. सामाजिक संगठनों और सरकारी कार्यालयों से झंडों के ऑर्डर महीनों पहले आने लगते हैं. इसी के अनुसार तिरंगा निर्माण का कार्य भी पहले से शुरू कर दिया जाता है. ताकि गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो.

तिरंगे के हर नियम का पालन
यहां बनने वाले तिरंगे की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 रखा जाता है. रंगों की पहचान भी पूरी तरह निर्धारित मानकों के अनुसार होती है. कपड़े की सिलाई मजबूत होती है ताकि झंडा लंबे समय तक सम्मानपूर्वक उपयोग में लाया जा सके. आश्रम में यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी झंडा नियमों से हटकर न बने.

कीमत में सस्ता गुणवत्ता में श्रेष्ठ
गांधी आश्रम में मिलने वाले तिरंगे आम लोगों की पहुंच में हैं. झंडों की कीमत 50 रुपये से शुरू होकर 100 रुपये तक रहती है. कम कीमत के बावजूद गुणवत्ता में कोई कमी नहीं की जाती. यही कारण है कि हर वर्ग के लोग यहां से तिरंगा खरीदना पसंद करते हैं.

गोरखपुर की शांत देशभक्ति का प्रतीक
गांधी आश्रम का तिरंगा शोर नहीं करता. लेकिन हर 26 जनवरी और 15 अगस्त को पूरे गोरखपुर में उसकी मौजूदगी नजर आती है. यह उस शांत देशभक्ति का प्रतीक है जो नियम. सम्मान और जिम्मेदारी के साथ राष्ट्रध्वज को ऊंचा रखती है. गोरखपुर का गांधी आश्रम वास्तव में तिरंगे की गरिमा को जीवित रखने का काम कर रहा है.

Location :

Gorakhpur,Uttar Pradesh

First Published :

January 25, 2026, 19:04 IST

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बाजार से अलग भरोसे की पहचान, फ्लैग कोड पर खरा उतरता तिरंगा



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