
ब्यूरो रिपोर्ट सोनभद्र।
कीट, रोग के लक्षण परिलक्षित होने पर तत्काल सुझाव एवं संस्तुतियों को अपनाकर फसल की किसान भाई करें सुरक्षा-जिला कृषि रक्षा अधिकारी।
सोनभद्र। जिला कृषि रक्षा अधिकारी कमलेश कुमार सिंह ने अवगत कराया है कि किसान भाइयों रबी की प्रमुख फसलों में गेंहू, राई/सरसो, मटर एवं आलू में लगने वाले कीट/रोग एवं खरपतवारों से बचाव हेतु नियमित निगरानी करें। कीट, रोग के लक्षण परिलक्षित होने पर तत्काल सुझाव एवं संस्तुतियों को अपनाकर फसल को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गेंहू में चैड़ी एवं संकरी पत्ती वाले खरपातवारों जैसे- गुल्ली डंडा, चटरी-मटरी, बथुवा, कृष्णनील आदि की समस्या देखी जाती है। संकरी पत्ती वाले खतपतवारों यथा-गेहूसा एवं जंगली जई के नियंत्रण हेतु सल्फोसल्यूराॅन 75 प्रतिशत डब्लू0जी0 33 ग्राम (2.5 यूनिट) मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 500 मीटर पानी में घोलकर प्रथम सिंचाई के बाद 25-30 दिन की अवस्था पर छिड़काव करें। दीमक का प्रकोप दिखने पर व्यूवेरिया वैसियाना की 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 400-500 लीटर पानी में मिलाकर सायंकाल छिड़काव करें। रासायनिक नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ई0स0 की 2.5 लीटर मात्रा को सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें। राई-सरसो- मौसम के तापमान में गिरावट होने पर राई/सरसों की फसल माहू कीट के प्रकोप होने की संभावना होती है। यदि कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति पर 5 प्रतिशत पौधे से अधिक हो तो रसायनों में से किसी एक को प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत, एस0एल0 250 मिली। थायामेथेक्साम 25 डब्ल्यूजी 50-100 ग्राम। आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ई0सी0 1.0 लीटर। यदि अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा क समस्या प्रकाश मंे आने पर इप्रोडियान 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 की 2.5-3.0 किग्रा0 प्रति हे0 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। मटर का बुकनी रोग- इस रोग के नियंत्रण हेतु रसायनों में से किसी एक को प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत डब्लू0पी0 2 किलोग्राम। कार्बेण्डाजिंम 50 प्रतिशत डब्लू0पी0-250 ग्राम। आलू की फसल में अगेती/पछेती झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों पर भूरे एवं काले रंग के धब्बे बनते हैं तथा तीव्र प्रकोप होने पर सम्पूर्ण पौधा झुलस जाता है, रोग के प्रकोप की स्थिति में रसायनों में से किसी एक को प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 600-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। कापरआक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत, डब्लू0पी0-2.5 किलोग्राम। मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0-2.0 किलोग्राम। मेटालैक्सिल 8 प्रतिशत, मैंककोजेब 64 प्रतिशत डब्लू0पी0-2.0 किलोग्राम डालें।

