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खेतों में गिरने वाला पाला पौधों की ऊपरी सतह पर जम जाता है, जिससे कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. इसका सीधा असर फसल की बढ़वार और दाने बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है. ऐसे में किसानों को सलाह दी जा रही है कि सर्दी के मौसम में खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें.
कन्नौज: कन्नौज में कड़ाके की ठंड और लगातार गिरते तापमान का असर रबी फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है. खासकर सरसों की फसल इस समय पाले और शीत लहर की चपेट में आने का खतरा झेल रही है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उचित देखभाल न की जाए, तो पाला सरसों के पौधों की पत्तियों, फूलों और फलियों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे उत्पादन में गिरावट आना तय है.
क्या करें उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार खेतों में गिरने वाला पाला पौधों की ऊपरी सतह पर जम जाता है, जिससे कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. इसका सीधा असर फसल की बढ़वार और दाने बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है. ऐसे में किसानों को सलाह दी जा रही है कि सर्दी के मौसम में खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें. यदि मिट्टी में नमी बनी रहती है, तो पाले का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है.
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि हल्की सिंचाई करने से खेत का तापमान संतुलित रहता है. सिंचाई से जमीन की ऊष्मा बनी रहती है, जिससे पाले के जमने की संभावना कम हो जाती है. खासकर जब मौसम विभाग द्वारा अत्यधिक ठंड या पाले की चेतावनी दी जाए, तो रात के समय या सुबह तड़के हल्की सिंचाई करना लाभकारी साबित होता है. इससे सरसों की फसल सुरक्षित रहती है और फूल झड़ने की समस्या भी कम होती है.
क्या बोले कृषि अधिकारी
जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता बताते हैं कि सुबह के समय हल्की धूप मिलने पर फसल को कम नुकसान होता है. किसान खेत के चारों ओर धुआं करने या फसल अवशेष जलाकर भी पाले के प्रभाव को कम कर सकते हैं. हालांकि, यह उपाय सावधानी के साथ अपनाने की जरूरत है. किसानों का कहना है कि बदलते मौसम के कारण अब सरसों की खेती में जोखिम बढ़ गया है, कभी अचानक तापमान गिर जाता है, तो कभी कोहरा और पाला फसल को नुकसान पहुंचा देता है. ऐसे में मौसम की नियमित निगरानी और समय पर सिंचाई बेहद जरूरी हो गई है.
सही देखभाल है जरूरी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर देखभाल, नमी प्रबंधन और मौसम के अनुसार किए गए उपायों से सरसों की फसल को पाले से बचाया जा सकता है. यदि किसान इन बातों का ध्यान रखें, तो न केवल फसल सुरक्षित रहेगी बल्कि बेहतर पैदावार भी हासिल की जा सकेगी.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



