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who is Vivek Lakra: विवेक लाकड़ा को इतनी बड़ी बोली लगने की उम्मीद नहीं थी. भारतीय टीम के युवा गोलकीपर को पहली पसंद हॉकी नहीं थी. उनके पिता हॉकी को काफी पसंद करते थे. लाकड़का ने कहा कि उनके पिता ने ही इस खेल से उन्हें जोड़ा. लाकड़ा का बेस प्राइस 2 लाख रुपये था.
विवेक लाकड़ा की किस्मत बदल गई. नई दिल्ली. युवा गोलकीपर विवेक लाकड़ा ने पैसों की दिक्कतों के बीच सीनियर खिलाड़ियों से किट उधार लेकर खेलना शुरू किया था. अब वह हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) में सबसे महंगे और सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले जूनियर खिलाड़ी बन गए हैं. श्राची बंगाल वॉरियर्स ने उन्हें 23 लाख रुपये में अपनी टीम में लिया है. हाल में 18 साल के हुए लाकड़ा ओडिशा के सुंदरगढ़ से हैं, लेकिन वह मानते हैं कि हॉकी उनकी पहली पसंद नहीं थी. उनके पापा को हॉकी बहुत पसंद थी और उन्होंने ही विवेक को इस खेल से जोड़ा.
विवेक लाकड़ा (Vivek Lakra) ने कहा, मुझे इतनी बड़ी रकम मिलने की उम्मीद नहीं थी क्योंकि मेरा बेस प्राइस दो लाख रुपये था. नीलामी के वक्त मैं बस यही सोच रहा था कि कोई भी टीम मुझे ले ले. जब बोली लगी तो मैं अपने दोस्तों के साथ देख रहा था. मेरी बोली 23 लाख रुपये लगी और सबसे पहले मैंने अपने पापा को बताया. परिवार में सब बहुत खुश हैं क्योंकि हम कुछ आर्थिक दिक्कतों से गुजर रहे थे. उन्होंने कहा, शुरू में मुझे हॉकी उतनी पसंद नहीं थी. मुझे फुटबॉल और क्रिकेट ज्यादा अच्छे लगते थे. लेकिन मेरे पापा को हॉकी का बहुत शौक था. उन्होंने मुझे एक कोच से मिलवाया जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. उन्होंने मुझे खेल की बेसिक बातें और इसमें आगे बढ़ने के मौके बताए. परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी, इसलिए सफर आसान नहीं था और मुझे सीनियर खिलाड़ियों से पुरानी गोलकीपिंग किट उधार लेनी पड़ती थी.’

विवेक लाकड़ा की किस्मत बदल गई.
लाकड़ा ने कहा कि मैंने 2016 में हॉकी खेलना शुरू किया था. लाकड़ा ने कहा, पहले मैं जूनियर कैंप में गया और फिर राउरकेला के स्पोर्ट्स हॉस्टल में एडमिशन लिया, लेकिन वहां गोलकीपिंग किट जैसी सुविधाएं नहीं थीं. इसलिए कुछ महीनों तक स्ट्राइकर के तौर पर खेला. स्टोर रूम में सीनियर खिलाड़ियों की कुछ पुरानी किट पड़ी थीं, मैंने उन्हें सिलकर ठीक किया और गोलकीपिंग शुरू की. लेकिन फिर लॉकडाउन लग गया. जब मैं लॉकडाउन के बाद लौटा तो एक सीनियर खिलाड़ी ने मुझे अपनी पुरानी किट दे दी. फिर मैं ओडिशा की टीम के साथ मलेशिया एक्सपोजर टूर पर गया. खेलो इंडिया खेला, जहां हम रनर-अप रहे और अगले साल चैंपियन बने.
विवेक ने कहा कि मैं भारतीय जूनियर टीम के साथ जर्मनी में चार देशों के टूर्नामेंट में भी गया. भारतीय टीम के पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश लाकड़ा के लिए प्रेरणा हैं. श्रीजेश अभी भारतीय पुरुष जूनियर टीम के हेड कोच हैं. उन्होंने कहा, श्रीजेश भाई मेरे लिए प्रेरणा हैं. मैंने उन्हें 2018 में भुवनेश्वर में वर्ल्ड कप खेलते देखा था और तभी से वह मेरे लिए आदर्श बन गए. मैं एचआईएल में भारत और विदेश के अनुभवी गोलकीपरों जैसे पाठक भैया (कृष्ण बहादुर पाठक), सूरज भैया (करकेरा) से भी सीखना चाहता हूं.’
पुरुषों की एचआईएल तीन जनवरी से चेन्नई में शुरू होगी.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें


