अखलाक… ये नाम सुनकर उनके साथ हुई खौफनाक घटना याद आ जाती है. किस तरह एक इंसान दूसरे इंसान को मौत के घाट उतार सकता है, ये इस मामले से समझ आता है. एक बार फिर ये नाम सुर्खियों में छा गया है. इसका कारण है साल 2015 में हुआ एक हत्याकांड. बिसाड़ा गांव में वर्ष 2015 में हुए चर्चित अखलाक हत्याकांड को लेकर कानूनी लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है. कोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को एक ऐसा फैसला सुनाया, जिससे सरकार भी दंग रह गई. आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है, सरकार ने क्या कुछ याचिका दायर की थी, कोर्ट का फैसला… सबकुछ.
पुलिस जांच में 10 आरोपियों और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या समेत भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। दिसंबर 2015 में चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन मुकदमे की सुनवाई फरवरी 2021 में शुरू हो सकी। बीच में बार-बार तारीखें बढ़ने, कोविड-19 महामारी और प्रशासनिक तबादलों के चलते मामला लंबा खिंचता रहा। बाद में आरोपियों की संख्या बढ़कर 18 हो गई, जिनमें तीन नाबालिग भी शामिल थे। इनमें से दो आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष सभी आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं।
राज्य सरकार की ओर से पिछले महीने अतिरिक्त जिला सरकारी वकील भग सिंह भाटी ने अदालत में मुकदमा वापस लेने का आवेदन दाखिल किया था। सरकार का तर्क था कि मुकदमा वापस लेने से साम्प्रदायिक सौहार्द बहाल होगा। आवेदन में यह भी कहा गया कि घटना में किसी तरह के आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल नहीं हुआ, दोनों पक्षों में कोई पुरानी रंजिश नहीं थी। फॉरेंसिक रिपोर्ट में घर से मिला मांस गाय या उसके वंश का बताया गया है। इसके अलावा यह भी उल्लेख किया गया कि अब तक केवल एक प्रमुख गवाह का बयान दर्ज हुआ है।
अखलाक की पत्नी इकरामन ने अपनी याचिका में राज्य सरकार समेत 21 लोगों को प्रतिवादी बनाया है, जिसमें सभी आरोपी भी शामिल हैं. याचिका में मांग की गई है कि सरकारी आदेश को रद्द किया जाए. पीड़ित परिवार के मुताबिक हत्या जैसे गंभीर मामले में मुकदमा वापस लेना कानून का दुरुपयोग है. भविष्य के लिए बेहतर नजीर नहीं है. इसके अलावा परिवार ने ट्रायल कोर्ट में भी अपनी आपत्ति दर्ज की है.
10 साल बाद इंसाफ की आस लगाए परिवार अब मुकदमे को कोर्ट में रखने की जद्दोजहद कर रहा ह. अब हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या फैसला लेगा या पांच जनवरी को ही पता चलेगा. लेकिन एकाएक यह चर्चित मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है.


