नई दिल्ली. बॉलीवुड में वैसे को हर तीज-त्योहार को लेकर ए से बढ़कर एक गाने बने हैं. शादी पर भी बॉलीवुड में ऐसे-ऐसे गाने बने जो 60 के दशक से आज तक फेमस हैं. फिर वो बेटी की मेहंदी के लिए हो या विदाई के लिए. हर पल के लिए बॉलीवुड ने एक खास मूड, खास धुन और खास यादें दी हैं. ‘दिन शगना दा’, ‘मेहंदी है रचने वाली’, ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’, ‘माइन माइन मुंडेर पर’ ऐसे कई गाने हैं, जो सदाबाहर हैं. पिया मिलन की बेला में इन दिनों एक गाना काफी पॉपुलर है. जो आज हर दुल्हन का फेवरेट है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कालजयी गीत सिंगर में पिता की मौत के बाद मां के लिए लिखा था.
ये गाना और कोई नहीं बल्कि कैलाश खेर का सुपरहिट गाना ‘पिया घर आवेंगे’ हैं. दुल्हन की विदाई से लेकर बारात के स्वागत तक, यह गाना खुशी और उत्साह का प्रतीक बन गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गीत प्यार की कहानी नहीं, बल्कि एक पिता की मौत के दर्द से उपजा है?
2009 से हर दुल्हन का है फेवरेट
कुछ गीत लिखते ही अमर हो जाते हैं और ये गीत उन्हीं में से एक है. कैलाश खेर के पिता पंडित मेहर सिंह खेर 2009 में इस दुनिया को अलविदा कह गए. इस गाने को उन्होंने पिता की मौत के बाद ही लिखा और कंपोज किया. यह गीत उनके एल्बम ‘चंदन में’ का हिस्सा है, जो कैलासा बैंड का तीसरा एल्बम था. गाने को आवाज दी थी कैलाश खेर, परेश कामथ और नरेश कामथ ने. गाने के बोल ‘हे री सखी मंगल गाओ री, धरती अम्बर सजाओ री’ हर दुल्हन को अपने पिया के मिलन की याद दिलाते हैं, लेकिन इसके पीछे कैलाश का व्यक्तिगत दुख और आध्यात्मिक जश्न छिपा है.
मां की भावनाओं को उड़ेला
कैलाश खेर ने एक इंटरव्यू में इस गाने को लिखने के पीछे का दुख और सुख दोनों बयां किया था. उन्होंने कहा था कि 2009 के नवंबर में मेरे पिता का अचानक निधन हो गया. वह बताते हैं कि मेरी का निधन पहले ही चुका था और फिर पिता भी छोड़कर चले गए. कैलाश खेर ने बताया था कि ये गाना फिर अपनी मां की खुशी के इजहार के चलते लिखा था, कि कैसे अब उनकी मां अपने पति का स्वागत स्वर्ग में कैसे किया होगा. ये गाना उनकी मां की सालों बाद स्वर्ग में अपने पति से मिलन को बताता है.’ कैलाश ने इसे ‘दूसरी शादी’ का रूप दिया, जहां आत्मा परमात्मा से मिलती है.
गाने की भावना को दर्शाते हैं बोल
गाने के बोल इसी भावना को दर्शाते हैं ‘चोक पुराओ, माटी रंगाओ, आज मेरे पिया घर आवेंगे…’ यहां ‘पिया’ प्रेमी नहीं, बल्कि परमात्मा का प्रतीक है, और ‘घर आना’ मौत के बाद की घर वापसी. ‘हे री सखी मंगल गाओ री’ में मंगल का अर्थ शुभ गान है, लेकिन यह दुख की छाया में जश्न मनाने की बात करता है. कैलाश कहते हैं, ‘पूरी दुनिया को इस पल का जश्न मनाना चाहिए क्योंकि मेरा प्रिय जल्द ही यहां होगा.’ वह बताते हैं कि आज भी जब वे यह गाना सुनते हैं, तो आधे घंटे तक कोई और गाना नहीं सुनना चाहते, क्योंकि यह उन्हें पिता की यादों में डुबो देता है.
दुख को खुशी में बदलने का माध्यम
गीत के भाव गहरे आध्यात्मिक हैं. इसमें खुशी, उत्साह और लंबे इंतजार के बाद मिलन की मिठास है, लेकिन नीचे दर्द की परत है. ‘उतरेगी आज मेरे पी की सवारी, हर कोई काजल लाओ री, मोहे काला टीका लगाओ री’ जैसे बोल तैयारी और सुरक्षा का संदेश देते हैं. कैलाश ने इसे दुख को खुशी में बदलने का माध्यम बनाया. आज यह गाना शादियों में फेवरेट है, जहां दुल्हनें इसे अपने पिया के आने की खुशी में गाती हैं, बिना यह जाने कि इसके पीछे एक बेटे का पिता के लिए ट्रिब्यूट है.
लाखों दिलों को भाया ‘पिया घर आवेंगे’
‘पिया घर आवेंगे’ ने न सिर्फ लाखों दिलों को छुआ, बल्कि मौत को जीवन के जश्न के रूप में देखने का नजरिया दिया. कैलाश की आवाज में यह गीत अमर हो गया, जो दर्द को मंगल में बदल देता है. यूट्यूब पर इसके लिरिकल वीडियो लाखों व्यूज बटोर चुके हैं और जियोसावन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यह एवरग्रीन है.


