ऐसे में मांग कम होने के बाद कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. हालांकि कारोबारियों ने सरकार से नए रास्तों पर विचार करने की मांग की है. मिर्जापुर जिले के बड़े कालीन व्यापारी विक्रम जैन ने लोकल 18 से बताया कि अमेरिका ने पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जो बुधवार को 9 बजे से 50 प्रतिशत हो गया. अमेरिका के खरीदार और कालीन के कारोबार से जुड़े व्यापारियों को उम्मीद थी कि सरकार बीच का रास्ता निकालेगी, लेकिन अब समाधान की उम्मीद बेहद कम है. ऐसे में हस्तनिर्मित कालीन का कारोबार खत्म हो जाएगा और हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ जाएगा.
गौरतलब है कि मिर्जापुर, भदोही, पानीपत और मेरठ की करीब 80 प्रतिशत कालीन अमेरिका जाती है. अचानक से टैरिफ लगने से बड़ा कारोबार प्रभावित हो चुका है. विक्रम जैन ने बताया कि टैरिफ लगने के बाद अमेरिका के खरीदारों द्वारा जो ऑर्डर था, उसे रोक दिया गया है. ऐसे में हमारा काफी माल मुंबई के पोर्ट पर पड़ा हुआ है और बाकी माल गोदाम में पड़ा हुआ है. नए कालीन की मांग नहीं आ रही है, जिससे कालीन का कारोबार पूरी तरह से खत्म हो रहा है. हफ्तेभर से बुनकरों को काम नहीं मिला है और आगे भी उम्मीद धूमिल नजर आ रही है.
15 हजार बुनकरों पर खतरा
विक्रम जैन ने बताया कि कालीन की बुनाई एक कला है. यहां हाथों से कालीन तैयार किया जाता है. हालांकि, काम नहीं होने पर नए कारीगर इस कारोबार से नहीं जुड़ेंगे, जिससे प्राचीन कला का अस्तित्व संकट में आ जाएगा. जो 15 हजार से अधिक बुनकर हैं, वे भी बेरोजगार हो जाएंगे. अकेले अमेरिका ही हमारे कालीन का बड़ा खरीदार है. वहीं, यूरोप और एशिया के कुछ देशों में भी सप्लाई की जाती है.
विक्रम जैन ने बताया कि कालीन का 12 हजार करोड़ का कारोबार है. अकेले अमेरिका ही 6 से 7 हजार करोड़ का कालीन निर्यात करता है. हालांकि, अब यह कारोबार सिमट जाएगा. अमेरिका के अलावा दुबई, ब्राजील, रूस और यूरोपीय देशों में भी मांग है, जहां पर सप्लाई की जा रही है. फिलहाल अमेरिकी बाजारों से मिर्जापुर का कालीन गायब हो गया है.
सरकार करें ड्रा बैक की सुविधा
विक्रम जैन ने कहा कि सरकार को ड्रा बैक की सीमा बढ़ानी चाहिए. अभी तीन प्रतिशत का अनुदान मिल रहा है, इसे 25 प्रतिशत करने की मांग की. जब तक टैरिफ विवाद का समाधान नहीं निकलता, तब तक सरकार ड्रा बैक दे, ताकि कारोबारियों को लंबा घाटा न हो. टैरिफ का समाधान होने के बाद यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है.


