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बाजार में बढ़ती चिकन और अंडे की मांग के बीच मुर्गी पालन का व्यवसाय तेजी से लोकप्रिय हो रहा है खासकर असील नस्ल की मुर्गी अपने अनोखे गुणों, औषधीय लाभ और उच्च बाजार मूल्य के कारण किसानों और पालन करने वालों के लिए आकर्षक विकल्प बन चुकी है. आइए जानते है इसके बारे में..

बाजारों में बढ़ती चिकन और अंडे की मांग को देखते हुए मुर्गी पालन का व्यवसाय तेजी से फैल रहा है. लोग मुर्गी पालन करके अंडा और चिकन दोनों की बिक्री से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. ऐसे में उन्नत नस्लों की मुर्गियों की मांग भी बढ़ रही है. इनमें एक खास नस्ल है असील मुर्गी, जो अपने अनोखे गुणों के कारण जानी जाती है और कड़कनाथ जैसी लोकप्रिय नस्ल को भी टक्कर देती है.

असील नस्ल की मुर्गी अन्य मुर्गियों से काफी अलग और विशेष होती है. एक नर असील मुर्गे का वजन 4-5 किलोग्राम तक होता है, जबकि मादा असील का वजन 3-4 किलोग्राम तक हो सकता है. यह वजन अन्य नस्लों की मुर्गियों की तुलना में अधिक होता है, जो इसे खास बनाता है.

असील मुर्गी की बनावट भी इसे अन्य मुर्गियों से अलग बनाती है. इसका मुंह लंबा और बेलनाकार होता है, आंखें घनी और पंख काले, लाल या मिश्रित रंगों के होते हैं. लंबी गर्दन और मजबूत, सीधी टांगें इसे और भी विशेष बनाती हैं. इसकी पूंछ भी अन्य मुर्गियों की तुलना में लंबी होती है.

असील मुर्गी की कुल 7 प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं: नूरी (सफेद), यारकिन (काली और लाल), पीला (सुनहरी लाल), कागर (काली), टीकर (भूरी), चित्ता (काले और सफेद सिल्वर) और रेज़ा (हल्की लाल).

यह मुर्गी एक साल में 60 से 70 अंडे देती है, जो अन्य नस्लों की तुलना में कम हैं. लेकिन, असील नस्ल के अंडे और मांस के औषधीय गुणों के कारण इसका बाजार मूल्य काफी ऊंचा है. असील मुर्गी का एक अंडा बाजार में लगभग 100 रुपए में बिकता है, जबकि एक असील मुर्गी की कीमत 2000 से 2500 रुपए तक हो सकती है.

असील मुर्गी के अंडे और मांस में औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो इसे बारिश और ठंड के मौसम में विशेष रूप से लोकप्रिय बनाते हैं. पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा के अनुसार, इस नस्ल के अंडों का सेवन आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसके मांस और अंडे को दवाओं के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है.

असील मुर्गी प्रमुख रूप से आंध्र प्रदेश, राजस्थान, दक्षिण पंजाब, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में पाई जाती है. यह मुर्गी अपनी लड़ाकू प्रवृत्ति के लिए भी जानी जाती है और इसे “लड़ाकू मुर्गी” के नाम से भी पहचाना जाता है, क्योंकि यह झगड़ों में बेहद माहिर होती है. असील मुर्गी न केवल अपनी शारीरिक बनावट और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी कीमत भी इसे खास बनाती है, जो मुर्गी पालन में इसे एक बेहतरीन विकल्प बनाती है.

असील नस्ल की मुर्गी के बारे में जानकारी देते हुए रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि असील नस्ल की मुर्गी लड़ाकू प्रवृत्ति की होती है, परंतु इसका मांस और अंडा दोनों ही बेहद फायदेमंद होते हैं. बाजारों में इन्हें महंगे दामों में बेचा जाता है और इसका पालन करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.


