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साहित्यकार डॉ वीरेंद्र आजम ने लोकल 18 से कहा कि यह बात सही है कि सहारनपुर में क्रांतिकारियों की बड़ी बम फैक्ट्री थी. सहारनपुर से पहले आगरा में क्रांतिकारियों का बम बनाने का कारखाना था. आगरा में कोलकाता से यतींद…और पढ़ें
इस दौरान आगरा से बम और हथियार बनाने की फैक्ट्री को सहारनपुर को सुरक्षित स्थान देखते हुए यहां पर फैक्ट्री को स्थापित किया गया था. डॉक्टर गयाप्रसाद, शिव वर्मा, जयदेव कपूर और मुकंद सिंह चारों लोगों को फैक्ट्री संचालित करने की जिम्मेदारी दी गई थी. जो सहारनपुर शहर के एक छोटे से मोहल्ले चौक फरोसान में किराए की दुकान लेकर उसमें हथियार बनाने का काम किया जाता था. उन हथियारों को कई प्रदेशों में देश की आजादी की लड़ाई में इस्तेमाल के लिए सप्लाई किया जाता था. इतना ही नहीं बाहर से बनकर आने वाले हथियार भी यहीं पर रखे जाते थे.
साहित्यकार डॉ वीरेंद्र आजम ने लोकल 18 से कहा कि यह बात सही है कि सहारनपुर में क्रांतिकारियों की बड़ी बम फैक्ट्री थी. सहारनपुर से पहले आगरा में क्रांतिकारियों का बम बनाने का कारखाना था. आगरा में कोलकाता से यतींद्र नाथ बम बनाने की ट्रेनिंग देने के लिए आया करते थे. जब भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा निर्धारित किया गया. वह असेंबली में बम फेंक कर धमाका करेंगे और गिरफ्तारी देंगे. उसको ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया कि आगरा से बम फैक्ट्री शिफ्ट की जाए तो कहां पर शिफ्ट की जाए उसके लिए उसके लिए सहारनपुर को सुरक्षित स्थान मानते हुए यहां बम फैक्ट्री को शिफ्ट किया गया था. सहारनपुर में एक बहुत पुराना मोहल्ला है चौक फरोसान जिसमें एक मकान किराए पर लिया गया.
बम फैक्ट्री शुरू की गई
वहां पर बम फैक्ट्री शुरू की गई क्रांतिकारी के एक साथी थे. डॉक्टर गयाप्रसाद, शिव वर्मा, जयदेव कपूर और मुकंद सिंह चारों लोगों को यह जिम्मेदारी दी गई. वो यहां पर बम बनाने का कारखाना स्थापित करें और उसको संचालित करें. जबकि नीचे एक दुकान सिर्फ दिखावे के लिए चलाई गई. उस दुकान के ऊपर फैक्ट्री संचालित हो रही थी. जो हथियार दूसरी जगह से आते थे वह भी यहां पर संग्रहित होते थे तो इस बीच में यह हुआ कि असेंबली में बम विस्फोट हो गया और लाहौर में भी बम फैक्ट्री पकड़ी गई सुखदेव को गिरफ्तार कर लिया गया उस दौरान हुआ कि सहारनपुर से भी बम फैक्ट्री को शिफ्ट किया जाए.
क्रांतिकारियों का बम बनाने का कारखाना
उस समय जयदेव कपूर और मुकंद सिंह किसी काम से बाहर गए हुए थे. उसे दौरान कुछ लोगों की नजर पड़ी कि ऊपर कुछ लोगों के कपड़े सूखते हैं. कुछ लोगों ने पुलिस को इसकी मकबरी की और पुलिस ने संबंधित मानते हुए वहां पर छापेमारी की मौके पर मुकंद सिंह और जयदेव कपूर तो मिले नहीं गया प्रसाद और शिव वर्मा वहां से गिरफ्तार कर लिए गए. पुलिस ने वहीं पर डेरा डालकर जयदेव कपूर और मुकुंद सिंह के आने का इंतजार किया. 2दिन बाद जयदेव कपूर आए जिनको गिरफ्तार कर लिया गया. जब मुकंद सिंह स्टेशन पर उतरे तो उन्होंने कुछ लोगों को फैक्ट्री पकड़ने की चर्चाएं होती सुनी. उन्होंने वापस कानपुर जाकर चंद्रशेखर आजाद को यह सूचना दी की सहारनपुर में बम फैक्ट्री और हमारे साथी पकड़े गई.

