
निवर्तमान अध्यक्ष सहित कुल 6 प्रत्याशी होंगे आमने-सामने
विजय विद्रोही / विंध्य ज्योति
ओबरा/ सोनभद्र। बाबा भूतेश्वर दरबार महारुद्र सेवा समिति ओबरा 25 वर्षों से संचालित है समय-समय पर इसका चुनाव मनोनीत द्वारा होते रहे जिसे भी बाबा भूतेश्वर दरबार महा रूद्र सेवा समिति का अध्यक्ष पद दिया जाता है वह मंदिर में तमाम पर्व पर होने वाले कार्यक्रमों को अध्यक्ष अपनी टीम द्वारा पूर्ण कराता है कुछ वर्षों से संस्था के नियमों में परिवर्तन किया गया की जो भी अध्यक्ष के रूप में आएगा उसका कार्यकाल 2 साल का ही रहेगा उसके पश्चात उसे उस पद को त्याग कर संस्था के साथ जुड़कर कार्य करना पड़ेगा। इसी क्रम में 25 जून को संस्था के प्रबंधक द्वारा तत्काल प्रभाव से लिखित रूप में समाचार पत्रों के माध्यम से समिति को भंग कर दिया गया। क्योंकि वैसे भी समिति के अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होते ही समिति अपने आप भंग हो जाती है ऐसी स्थिति में प्रबंधक रामआश्रय बिंद द्वारा अगले को कार्यभार सौंपने से पहले प्रबंधक की देखरेख में रहता है यह नियम में लागू है। आपको बताते चलें की आगामी 10 जुलाई को होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पांच प्रत्याशियों का नाम संस्था के प्रबंधक के पास आया है। जिसमें मनीष कुमार पाण्डेय, मनोज कुमार सोनी, धर्मेंद्र कुमार यादव, रणजीत तिवारी, अजीत कुमार सिंह अध्यक्ष पद के प्रत्याशी इस तरह पांच प्रत्याशियों का नाम आज दिनांक 9 जुलाई को घोषित किया जाता है। वे अपने-अपने समर्थन के साथ 10 जुलाई को उपस्थित रहेंगे। वर्तमान में अध्यक्ष पद पर रह चुके विकास कुमार तिवारी भी पुनः दोबारा इस चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के रूप में है। 10 जुलाई को बाबा भूतेश्वर दरबार के प्रांगण में गुरु पूर्णिमा बड़े ही भव्यता के साथ मनाया जाएगा जिसमें भव्य भंडारे का आयोजन है उसमें आप सम्मिलित होकर पुण्य के भागीदार बने। बाबा भूतेश्वर दरबार के समस्त कार्यकर्ता समस्त सती सेवक की उपस्थिति अनिवार्य है क्योंकि 10 जुलाई को 2 से 4 पक्ष विपक्ष के दोनों तरफ से चुनकर चुनाव अधिकारी के रूप में रखा जाएगा, जिसकी देखरेख में यह चुनाव संपन्न होगा, गुप्त वोट देने की व्यवस्था की जाएगी। जो भी इस गुप्त ओट से चुनकर आएगा उसे ही समिति का अध्यक्ष घोषित किया जाएगा। और सभी कार्यकर्ता सभी सती सेवक हर तरह का मनमुटाव को छोड़कर उस अध्यक्ष का सम्मान करेंगे। ताकि एक दूसरे में एकजुटता लोगों की बरकरार रहे किसी को किसी तरह का मनमुटाव ना हो एकजुट होकर मंदिर के विकास के बारे में सोचें।

