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मेरठ में 17 जून को नमामि गंगे और कृषि विभाग की ओर से एक कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें खादर क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी ताकि बाढ़ से फसल नुकसान को कम किया जा सके.
खादर क्षेत्र
हाइलाइट्स
- मेरठ में 17 जून को किसानों के लिए कार्यशाला होगी.
- प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीक सिखाई जाएगी.
- कार्यशाला में भाग लेने के लिए कृषि विभाग से संपर्क करें.
मेरठ- पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के खादर क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों के लिए एक राहत भरी खबर है. हर साल बाढ़ और प्राकृतिक दिक्कतों के कारण जिन किसानों को फसल में भारी नुकसान होता है, उनके लिए अब समाधान खोजने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है. नमामि गंगे योजना और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से 17 जून 2025 को एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है.
नमामि गंगे मेरठ के जिला परियोजना अधिकारी तुषार गुप्ता ने लोकल-18 से खास बातचीत में बताया कि इस कार्यशाला में आधुनिक तकनीक आधारित खेती के गुर किसानों को सिखाए जाएंगे. इस पहल का उद्देश्य है कि मेरठ, हस्तिनापुर, किला परीक्षितगढ़ सहित अन्य खादर क्षेत्रों के किसान गंगा किनारे ऐसी खेती करें जिससे उनकी आय भी बढ़े और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़े.
प्राकृतिक खेती होगी कार्यशाला की प्रमुख थीम
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है. अधिकारी तुषार गुप्ता ने बताया कि गंगा किनारे बाढ़ के समय खेतों में जलीय जीव-जंतु आ जाते हैं और रासायनिक खादों व कीटनाशकों से उन्हें गंभीर नुकसान होता है. ऐसे में प्राकृतिक खेती न केवल किसानों के लिए फायदेमंद होगी, बल्कि गंगा की पारिस्थितिकी को भी संरक्षित करेगी.
यह कार्यशाला किसानों के लिए निशुल्क है और जो भी किसान इसमें भाग लेना चाहते हैं, वे अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या नमामि गंगे कार्यालय से संपर्क कर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. कार्यशाला में देश के अन्य राज्यों में की जा रही नई फसलों और तकनीकों की जानकारी भी साझा की जाएगी.
नई तकनीक से मिलेगा बाढ़ में भी बचाव
हर साल बाढ़ से होने वाले नुकसान को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि नई तकनीक आधारित खेती अपनाकर किसान फसल को बर्बाद होने से बचा सकते है. अगर यह पहल सफल होती है, तो मेरठ के किसानों की आय में निश्चित तौर पर इजाफा होगा और खादर क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है.
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