Last Updated:
Profitable Farming for Farmers: गोंडा के शिवकुमार मौर्य ने अपने घर पर अश्वगंधा की नर्सरी तैयार कर किसानों के लिए एक नया आयुर्वेदिक विकल्प पेश किया है. यह औषधीय पौधा स्वास्थ्य लाभ के साथ अच्छा मुनाफा देने वाला भी है. गोंडा के वातावरण में अश्वगंधा सफलतापूर्वक उग रही है. इसकी जड़, तना और पत्तियों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में होता है. किसान भाइयों के लिए यह खेती लाभकारी साबित हो सकती है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड वजीरगंज स्थित रायपुर गांव में खेती की एक नई तस्वीर उभर रही है. यहां के किसान शिवकुमार मौर्य ने एक अनोखी पहल करते हुए अपने घर पर ही अश्वगंधा की नर्सरी तैयार की है. आयुर्वेदिक पौधों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए शिवकुमार अब गोंडा के वातावरण में औषधि उगाने का काम कर रहे हैं. यह न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि किसानों के लिए भी अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है.
लखनऊ से मिला नर्सरी का आइडिया
शिवकुमार मौर्य बताते हैं कि उन्हें अश्वगंधा उगाने की प्रेरणा लखनऊ के प्रसिद्ध केंद्रीय औषधीय एवं सुगंध पौधा संस्थान (CIMAP) से मिली. वहां उन्होंने विशेष प्रशिक्षण लिया, जहां वैज्ञानिकों ने बताया कि गोंडा का वातावरण अश्वगंधा की खेती के लिए पूरी तरह अनुकूल है. वहीं से उन्हें बीज प्राप्त हुए और उन्होंने अपनी नर्सरी शुरू की. वर्तमान में उनकी नर्सरी पूरी तरह तैयार है और अब इसकी रोपाई का समय आ गया है.
शिवकुमार का जुड़ाव आयुर्वेद से पुराना है. उनके पिताजी एक अनुभवी वैद्य थे और शिवकुमार खुद भी वैद्य का काम करते हैं. उन्होंने सोचा कि जब दवाओं में अश्वगंधा का इतना महत्व है, तो क्यों न इसकी खेती खुद ही की जाए. शिवकुमार के अनुसार, अश्वगंधा में ऐसे जादुई तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं. गोंडा की जलवायु में इन पौधों का अच्छे से पनपना यहां के अन्य किसानों के लिए भी एक बड़ा संकेत है.
अश्वगंधा तनाव और मोटापे का काल
स्वास्थ्य के लिहाज से अश्वगंधा एक लाभकारी औषधि है. शिवकुमार बताते हैं कि इसमें ‘एडाप्टोजेनिक’ गुण होते हैं, जो आज के समय की सबसे बड़ी समस्या तनाव और चिंता को कम करने में मदद करते हैं. यह शरीर में कॉर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को संतुलित कर दिमाग को शांति देता है. इसके अलावा, अश्वगंधा उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो बढ़ते वजन या मोटापे से परेशान हैं.
जड़ से पत्ती तक, कुछ भी नहीं होता बेकार
अश्वगंधा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसका कोई भी हिस्सा व्यर्थ नहीं जाता. मुख्य रूप से इसकी जड़ों का उपयोग होता है, लेकिन इसके तने और पत्तियों का काढ़ा भी सेहत के लिए उतना ही लाभकारी है. शिवकुमार का मानना है कि किसानों को पारंपरिक गेहूं-धान के साथ-साथ ऐसी औषधीय फसलों की ओर बढ़ना चाहिए. इसकी मार्केट वैल्यू काफी अच्छी है, जिससे कम जमीन में भी किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं.
About the Author

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



