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अगर आप कम लागत में डेयरी और पशुपालन से मोटा मुनाफा कमाने का मन बना रहे हैं, तो बकरी पालन आपके लिए एक बेहतरीन और मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आबोहवा में बकरियों की दो ऐसी खास नस्लें हैं, जो न सिर्फ बंपर दूध उत्पादन देती हैं बल्कि मटन के कारोबार में भी पशुपालकों की जेब भर देती हैं. आइए जानते हैं जमुनापारी और बरबरी नस्ल की उन खूबियों और पहचान के बारे में, जिन्हें पालकर किसान हर मौसम में दोहरा लाभ उठा सकते हैं.
Saharanpur News: सहारनपुर में अक्सर गाय, भैंस के साथ-साथ बकरियों से भी दूध का उत्पादन लिया जाता है. बकरियों का दूध गाय, भैंस से कई गुना अधिक महंगा बिकता है, इसके साथ ही इनका इस्तेमाल मटन में भी किया जाता है. लेकिन अगर आप बकरी पालन कर रहे हैं तो आपको बकरी की ऐसी कौन सी नस्ल को पालना चाहिए, जो कि अच्छा दूध देने के साथ-साथ मटन में भी इस्तेमाल की जा सके और आपको ज्यादा फायदा हो. आज इस खबर में हम आपको बताएंगे कि पश्चिमी यूपी में बकरी की कौन सी नस्ल को ज्यादा पालना पसंद करते हैं, जो कि इधर के मौसम में ढलने के साथ ही दूध उत्पादन भी अच्छा दे.
पश्चिमी यूपी के लिए दो सबसे बेहतरीन नस्लें
वैसे तो बकरी की दो नस्लें, जिनमें जमुनापारी और बरबरी दूध उत्पादन के लिए सबसे अच्छी रहती हैं. जमुनापारी बकरी भारत की सबसे लंबी, ऊंची और शानदार नस्लों में गिनी जाती है, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा क्षेत्र से संबंधित है. यह नस्ल अपने उत्कृष्ट दूध और मांस उत्पादन (दोहरे लाभ) के लिए पशुपालकों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है. यह प्रतिदिन औसतन 2 से 4 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है. जबकि बरबरी बकरी नस्ल अपनी बेहतरीन रोग प्रतिरोधक क्षमता, छोटे आकार और अधिक बच्चे देने की खासियत के लिए जानी जाती है. यह मुख्य रूप से मांस और दूध दोनों के लिए पाली जाती है. यह रोजाना औसतन 1 से 2 लीटर तक दूध दे देती है. तो अगर आप भी दूध उत्पादन और मांस के लिए बकरी पालने की सोच रहे हैं तो ये दोनों नस्लें आपके लिए सबसे बेहतर होने वाली हैं.
पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताए दोनों नस्लों के फायदे
डॉ. सुबोध कुमार गोयल, उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि अगर हम UP की बात करें तो UP में दो तरह की नस्लें पाई जाती हैं और जिनसे हमें लाभ मिलता है, वो जमुनापारी और बरबरी हैं. जमुनापारी बकरी ज्यादातर मथुरा और एटा-इटावा के क्षेत्रों में पाई जाती है और बरबरी जो है, वो UP में, पंजाब और हरियाणा वाले क्षेत्रों में पाई जाती है. जमुनापारी और बरबरी दोनों बहुत अच्छी नस्लें हैं. ये दूध उत्पादन के लिए भी और मीट के लिए भी हम इनका पालन कर सकते हैं. जमुनापारी करीब दिन में दो से ढाई लीटर तक हमें दूध दे सकती है और बरबरी जो है एक से दो लीटर तक दूध देती है और साल में हमें इनसे दो बार बच्चे प्राप्त होते हैं, दो से चार बच्चे हम साल में इनसे प्राप्त कर सकते हैं.
जमुनापारी और बरबरी बकरी की शारीरिक पहचान
जमुनापारी बकरी ज्यादातर सफेद रंग की होती है और इसके चेहरे और गर्दन पर भूरे रंग के, काले रंग के चकत्ते हो सकते हैं. इसकी एक खास पहचान होती है-इसकी जो नाक होती है, वो तोते की चोंच की तरह से होती है और कान लंबे-लंबे होते हैं और पैर भी इसके थोड़े लंबे होते हैं, थोड़ा सा ये हाइट में अच्छी होती है. बरबरी जो है, वो गठीले शरीर की होती है, हाइट थोड़ी सी कम होती है, इस पर सफेद रंग व काले रंग के धब्बे होते हैं, कान इसके उठे हुए होते हैं और छोटे-छोटे होते हैं, चेहरा भी इसका छोटा होता है. ये इनकी पहचान है दोनों की. दोनों में हमें पालन में ये फायदा है कि ये हर मौसम में अपने को ढाल लेती हैं और दूध उत्पादन हो, चाहे मीट का उत्पादन हो, हमें दोनों व्यवसायों में इनसे लाभ होता है.
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Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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