नंबर वन स्थान गंवाने के बाद मेयर पुष्यमित्र ने वादा किया कि शहर में ट्रैफिक और इंडस्ट्री से होने वाले प्रदूषण (जिसमें PM10 कण भी शामिल हैं) को कम करने के लिए पूरे साल कदम उठाए जाएंगे।
भारत के सबसे साफ शहर इंदौर ने ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में अपनी टॉप पोजिशन गंवा दी है और वह दूसरे स्थान पर आ गया है। स्थानीय प्रशासन ने इस गिरावट के लिए PM10 के स्तर में हुई बढ़ोतरी को जिम्मेदार बताया है। साथ ही इसके स्तर को कम करने के लिए और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए और कड़े उपाय लागू करने की घोषणा की है।
इससे पहले साल 2025 के सर्वेक्षण में 200 में से 200 अंक प्राप्त करके शीर्ष पायदान पर रहने वाला इंदौर इस बार लखनऊ से महज एक अंक से पिछड़ गया और यह तमगा बरकरार नहीं रख सका। उधर इस बारे में मंगलवार को समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए शहर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, ‘PM10 कणों के मानकों में (शहर के) पीछे रहने के कारण वायु सर्वेक्षण में इंदौर को लखनऊ से एक अंक कम मिला है।’
सांस के साथ श्वसन तंत्र में चले जाता है PM10
बता दें कि PM10 (पार्टिकुलेट मैटर-10) हवा में मौजूद बहुत बारीक कण होते हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये गाड़ियों के धुएं, सड़क की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन से पैदा होते हैं। सांस लेने के दौरान ये इंसानी श्वसन तंत्र में चले जाते हैं।
सोमवार को हुई स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार की घोषणा
इससे पहले सोमवार को ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार’ के पांचवें सीजन के लिए रैंकिंग की घोषणा की गई। इसके चुनाव के लिए देश भर के शहरों और कस्बों को 2022-23 में जारी ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण फ्रेमवर्क’ के आधार पर रैंक किया गया था। इस फ्रेमवर्क में सड़क की धूल, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और औद्योगिक प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटने के उपाय बताए गए थे।
लखनऊ पहले स्थान पर, जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा
सर्वेक्षण में, 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ 200 में से 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जबकि भोपाल और आगरा 192-192 अंकों के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे। पिछले साल इंदौर ने पूरे 200 अंक हासिल करके सर्वेक्षण में टॉप किया था।
3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों में इसने मारी बाजी
इस रैंकिंग लिस्ट में ओडिशा का राउरकेला 198.5 अंकों के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शहर बनकर उभरा, इसके बाद यूपी का फिरोजाबाद और आंध्र प्रदेश का गुंटूर रहे। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ के तहत लखनऊ, राउरकेला और कलिंग नगर को उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया। इंदौर के मेयर ने PM10 लेवल को कम करने के उपायों का ऐलान किया।
मेयर बोले- अब पूरे साल प्रदूषण कम करने कदम उठाएंगे
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, मेयर ने वादा किया कि शहर में ट्रैफिक और इंडस्ट्री से होने वाले प्रदूषण (जिसमें PM10 कण भी शामिल हैं) को कम करने के लिए पूरे साल कदम उठाए जाएंगे। साथ ही घर-घर से कचरा जमा करने वाली सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने और कारखानों को डीजल के बजाय सीएनजी जैसे हरित ईंधन पर स्थानांतरित करने के लिए भी ठोस प्रयास किए जाएंगे।
गाड़ियों के प्रदूषण को कम करने चलाएंगे खास अभियान
भार्गव ने बताया कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा गाड़ियां इसी शहर में है। ऐसे में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने वाले अभियान तेज किए जाएंगे। इनमें ट्रैफिक सिग्नल पर ‘रेड लाइट ऑन, इंजन ऑफ’ (लाल बत्ती जलने पर इंजन बंद करना), इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देना और ई-बसें चलाना शामिल है।
उधर अधिकारियों का कहना है कि इंदौर की हवा की क्वालिटी का रिकॉर्ड अच्छा बना हुआ है। इंदौर नगर निगम के डेटा के मुताबिक, पिछले सालों की तुलना में शहर में PM10 लेवल में 15% से ज्यादा की कमी आई है। डेटा के अनुसार, ‘क्लीन एयर सर्वे’ के लिए जांच के समय के दौरान, 98% से ज़्यादा दिनों में इंदौर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) औसतन 200 से कम रहा था।


