CRPF की नौकरी जाने के बाद गिरवर सिंह तोमर साधु बन गए और करीब 24 साल तक मंदिर में रहे। इस दौरान पत्नी मंजूलता ने भैंस पालकर बच्चों की परवरिश की। बड़े भाई हरिओम सिंह ने बताया कि परिवार ने किन मुश्किलों के बीच उनका साथ दिया। 26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद गिरवर सिंह की CRPF में वापसी हुई है।
26 साल पहले CRPF की नौकरी छूटी तो गिरवर सिंह तोमर ने घर लौटकर ऐसा रास्ता चुना, जिसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं की थी। नौकरी से बर्खास्तगी के बाद वह साधु बन गए। परिवार से दूरी बनाई और मंदिरों में रहने लगे। दूसरी तरफ घर पर पत्नी और बच्चों की जिंदगी भी आसान नहीं थी। अब 26 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद गिरवर सिंह की CRPF में दोबारा वापसी हुई है तो परिवार पुराने दिनों को याद कर रहा है। जानिए उनकी पत्नी और बड़े भाई ने पुराने दिनों के क्या किस्से सुनाए।
पत्नी ने भैंस पालकर बच्चों को पाला
गिरवर सिंह की पत्नी मंजूलता तोमर के लिए ये 24 साल संघर्ष से भरे रहे। वह बताती हैं कि पति के साधु बनने के बाद बच्चों की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए उन्होंने भैंस पालकर किसी तरह बच्चों की परवरिश की। मंजूलता कहती हैं, “हम बहुत परेशान रहे। बच्चों को जैसे-तैसे भैंस रखकर पाला है। एक बेटा एयरफोर्स में है। अब तो सब ठीक हो गया है।” अपने पति को दोबारा नौकरी पाते देख वो बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा- अब पूरा परिवार बहुत खुश है।
बड़े भाई ने बताया गिरवर दास जिद्दी थे
गिरवर सिंह के बड़े भाई हरिओम सिंह तोमर बताते हैं कि 1991 में CRPF में भर्ती होने के बाद उनके भाई ने करीब नौ साल नौकरी की। इसी दौरान एक अधिकारी से विवाद हो गया। हरिओम के मुताबिक, गिरवर सिंह स्वभाव से जिद्दी थे और किसी की बात आसानी से नहीं मानते थे। विवाद के बाद उन्होंने अधिकारी से कहा कि उन्हें घर भेज दिया जाए। इसके बाद उनकी नौकरी चली गई।
बड़े भाई बोले- हम लोगों ने उनकी देखभाल की
हरिओम कहते हैं कि नौकरी जाने के बाद गिरवर सिंह घर लौटे और कुछ समय बाद साधु बन गए। उन्होंने बताया कि भाई ने बर्खास्तगी के खिलाफ कोर्ट में केस किया और परिवार की परेशानियों के बीच कानूनी लड़ाई चलती रही। हरिओम ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा- “बहुत परिस्थितियां झेलीं। हम लोगों ने ही उनकी देखभाल की।”
मंदिर में रहने लगे, दीक्षा पाकर बने ‘गिरवर दास’
नौकरी छूटने के बाद गिरवर सिंह ने करीब चार-पांच साल बारहद्वारी मंदिर में बिताए। इसके बाद वह मुरैना के गुफा मंदिर पहुंचे और धीरे-धीरे उनका पूरा जीवन आध्यात्म की ओर मुड़ गया। गुफा मंदिर के संत शिवशरण महाराज बताते हैं कि उनका पहले नाम गिरवर तोमर था। दीक्षा लेने के बाद उनका नाम गिरवर दास हो गया।
26 साल बाद फिर पहनी वर्दी
गिरवर सिंह ने 1999 में बर्खास्तगी के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की थी। अगस्त 2025 में अदालत ने CRPF को उन्हें दोबारा ज्वाइनिंग देने का आदेश दिया। लंबी प्रक्रिया के बाद 26 अगस्त 2026 को CRPF ने उनकी दोबारा सेवा में वापसी का आदेश जारी किया और उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पोस्टिंग दी गई।



