विधायक महतो ने थाना परिसर में मारपीट की किसी भी घटना से इनकार किया है और ऐसे आरोपों को निराधार बताया है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई थी, लेकिन मारपीट नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के बाहर आने से सच्चाई सामने आ जाएगी।
झारखंड में धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में चार दिन पहले हुई झड़प और हंगामे के मामले में पुलिस ने डुमरी विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों समेत 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इन सभी पर सरकारी काम में बाधा डालने और झूठी अफवाहें फैलाकर थाना परिसर में भीड़ जुटाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब इस मामले में JLKM (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्च) प्रमुख और विधायक जयराम महतो की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने पुलिस पर अपनी छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए उस दिन के थाने के सभी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका दावा है कि सच्चाई कैमरों और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग से सामने आ सकती है।
इस बारे में मीडिया से बात करते हुए महतो ने कहा, ‘उस दिन हॉट टॉक हुआ था, अगर हॉट टॉक कार्रवाई के दायरे में आता है तो कार्रवाई करिए, उससे अगर मेरी विधायकी भी जाती है तो कोई डर नहीं। लेकिन वहां सिर्फ हॉट टॉक (गर्मागर्म बहस) हुआ था, इसके अलावा और कुछ नहीं हुआ था।’ आगे उन्होंने कहा, ‘और उस हॉटटॉक में भी हमने थाने में जाकर केवल इतना सवाल पूछा था कि आप मारपीट क्यों किए? उसके अलावा तीसरी बात कुछ भी नहीं हुई थी।’
अपना बचाव करते हुए विधायक ने आगे कहा, ‘जब आप मेरा वीडियो रिकॉर्ड करके दुनिया को दिखा सकते हैं, तो थाने में मेरी एंट्री से लेकर बाहर आने तक का जो वीडियो फुटेज है, उसे दुनिया को दिखा दीजिए। अगर मेरी छवि धूमिल होती है उसकी जवाबदेही मेरी होगी। मैं दो घंटा थाने में रहा, इस बीच जो भी बातचीत हुई, उसके सारे सीसीटीवी फुटेज को बाहर रख दीजिए। हम केवल वहां बैठे थे, और एक ही लाइन बोले थे, कि आपने इसके साथ मारपीट क्यों की।’
खुद को बागी बताते हुए उन्होंने कहा कि अन्य कई विधायक और सांसद जो सार्वजनिक रूप से पुलिस अधिकारियों के साथ गालीगलौज कर चुके हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती, क्योंकि वह 300-400 विधायकों व सांसदों वाली पार्टी से संबंध रखते हैं। लेकिन जैसे ही हमारा नाम आता है, तो लोगों के तेवर बदल जाते हैं, क्योंकि हम बागी विधायक हैं।
बता दें कि 21 अगस्त को हुई इस घटना में बरवाअड्डा थाना प्रभारी ने विधायक और उनके समर्थकों पर पुलिस स्टेशन में आकर गाली-गलौज करने, धमकी देने, पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और थाने में बंद आरोपी को बाहर निकालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इस मामले में थाना प्रभारी के बयान पर 22 अगस्त को केस दर्ज किया गया था।
दरअसल ये पूरा विवाद गणेश दास नाम के एक शख्स को हिरासत में रखने से जुड़ा है। जिसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद विधायक जयराम महतो उसे छुड़ाने के लिए अपने करीब 40-50 समर्थकों के साथ थाने पहुंच गए थे। आरोप है कि इस दौरान MLA ने पुलिस पदाधिकारियों से अभद्र व्यवहार किया और अपने समर्थकों से थाने में बंद गणेश दास को बाहर निकालने के लिए कहा। थाना प्रभारी ने विधायक पर थाना पहुंचने से पहले वॉट्सऐप कॉल के जरिए धमकाने का भी आरोप लगाया है।



