लखनऊ में प्लाट लेने का प्लान कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। वरुण विहार और नैमिष नगर योजनाओं में भूखंडों की बुकिंग शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। जल्द रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा।

लखनऊ में प्लाट लेने का प्लान कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। वरुण विहार और नैमिष नगर योजनाओं में भूखंडों की बुकिंग शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है।
लंबे समय से आवासीय भूखंड का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अपनी महत्वाकांक्षी वरुण विहार और नैमिष नगर योजनाओं में भूखंडों की बुकिंग शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। दोनों योजनाओं के शुभारंभ के लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा गया है। उनके उद्घाटन के बाद पहले चरण में करीब 4000 भूखंडों के लिए पंजीकरण खोला जाएगा।
पहले चरण में 4000 भूखंडों का मौका
एलडीए अधिकारियों के अनुसार दोनों योजनाओं में आवंटन की स्थिति बन चुकी है। इसी के चलते पहले चरण में बड़ी संख्या में आवासीय भूखंड जनता के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। प्राधिकरण ने इसके लिए सभी प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली हैं और अब केवल औपचारिक शुभारंभ का इंतजार है।
तय हुई भूखंडों की कीमत
एलडीए ने दोनों योजनाओं में भूखंडों की दरें भी निर्धारित कर दी हैं। वरुण विहार योजना में भूखंड 2800 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से उपलब्ध होंगे, जबकि नैमिष नगर योजना में 3200 रुपये प्रति वर्गफुट की कीमत तय की गई है। दरों के निर्धारण के बाद अब पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
वर्षों की देरी की परंपरा टूटी
इन दोनों योजनाओं की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें शुरू होने के एक वर्ष के भीतर ही आवंटन योग्य स्थिति में पहुंचा दिया गया है। इससे पहले एलडीए की कई आवासीय योजनाएं 10 से 15 वर्षों तक विभिन्न कारणों से अटकी रहती थीं और लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था।
जरुरतमंदों को भूखण्ड व भवन उपलबब्ध कराया जाएगा
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि दोनों योजनाओं में एक साथ 4000 भूखण्डों के लिए पंजीकरण खोला जाएगा। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों को नियोजित क्षेत्रों में भूखंड प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। शहर के हर जरुरतमंदों को भूखण्ड व भवन उपलबब्ध कराया जाएगा।
बिल्डिंग बायलॉज में बड़ा बदलाव
वहीं शासन ने विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशंस-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्तावित बदलावों के तहत ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में कई सार्वजनिक और जनोपयोगी सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही 50 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों को लघु उद्योग भू-उपयोग श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है। शासन ने इन संशोधनों पर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के निस्तारण के लिए प्रदेश स्तरीय समिति का गठन कर दिया है।
ग्रीन बेल्ट में मिल सकेगी आवश्यक नागरिक सुविधाओं को मंजूरी
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से जारी प्रस्ताव के अनुसार ट्रांसफार्मर, ओवरहेड जलाशय, बिजली स्टेशन एवं सबस्टेशन, जलकार्य, माइक्रोवेव एवं वायरलेस केंद्र, सीवेज उपचार संयंत्र, कचरा संग्रह केंद्र, सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालय तथा अन्य जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े भवनों और प्रतिष्ठानों को ग्रीन बेल्ट भू-उपयोग में अनुमन्य किए जाने का प्रस्ताव है। इससे शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।



