लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर बिन्दुवार जवाब देने का आदेश दिया है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे के चालू होते ही जगह-जगह गड्ढे बन जाने व निर्माण में कथित भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर जवाब तलब किया है। न्यायालय ने भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा राज्य सरकार के परिवहन विभाग को याचिका में लगाए गए आरोपों पर बिन्दुवार जवाब देने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की याचिका पर पारित किया है। याचिका में कहा गया है कि 47 सौ करोड़ की लागत से बने उक्त एक्सप्रेस वे के चालू होने के 26 दिनों के भीतर इसमें 74 अलग-अलग स्थानों पर गड्ढे बन गए या सड़क टूट गई। याचिका में उक्त निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए, सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अथवा सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई है। याची ने उक्त एक्सप्रेस वे पर टोल टैक्स की भारी कीमतों का भी मुद्दा उठाया है। मांग की गई है कि टोल टैक्स कम किये जाएं।
13 जुलाई को लोकार्पण हुआ था
आपको बता दें कि लख्शनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का 13 जुलाई को लोकार्पण हुआ था और 14 जुलाई से आम वाहनों के लिए यातायात शुरू किया गया। शुरुआती दिनों में इसे लखनऊ और कानपुर के बीच तेज, सुरक्षित और सुगम आवागमन की नई कड़ी के रूप में प्रचारित किया गया। लेकिन, मानसून की दस्तक के साथ ही सड़क निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। सबसे गंभीर पहलू यह है कि कई स्थानों पर सड़क धंसने के बाद मरम्मत का काम करना पड़ रहा है। सीपेज वाले स्थानों पर भी पानी के स्रोत और उसके सड़क संरचना पर पड़ने वाले प्रभाव की पड़ताल की जा रही है। मिट्टी के घनत्व की जांच के साथ जल निकासी नालियों को दुरुस्त करने का काम भी जारी है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि निर्माण के दौरान मिट्टी की भराई और दबाव परीक्षण तथा जल निकासी व्यवस्था की जांच कितनी प्रभावी ढंग से हुई थी।
सड़क बनाने में प्रति किमी 66.67 करोड़ का खर्चा-
एक्सप्रेसवे की लंबाई 63 किलोमीटर है और इसके निर्माण पर करीब 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यानी औसतन करीब 66.67 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की लागत आई। इसमें छह लेन की सड़क के साथ 13.1 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड मार्ग, तीन बड़े पुल, 28 छोटे पुल, 38 अंडरपास और छह फ्लाईओवर शामिल हैं। एक्सप्रेसवे पर पहले 24 घंटे में 13,328 वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई थी।
शुरू होने के 13वें दिन ही धंसी सड़क-
एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही 14 जुलाई की सुबह आठ बजे से शुरू हुई थी। इसके 13वें दिन यानी 26 जुलाई को पहली बार किमी 64 पर कुरारी गांव के पास सड़क धंसी। उसके बाद सड़क धंसने का जो सिलसिला जारी हुआ, वह 12 अगस्त तक जारी रहा। इस दौरान 24 स्थानों पर सीपेज की समस्या सामने आई, जिसके कारण सड़क की तालकोल उखड़ गई।



