एमपी के बालाघाट जिले में अज्ञात रहस्यमयी बीमारी से कम से कम सात बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों में बुखार, चकत्ते और गुर्दे प्रभावित होने जैसे लक्षण दिख रहे हैं। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…
मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल बालाघाट जिले में बुखार, त्वचा पर चकत्ते और गुर्दे की क्षति जैसे लक्षणों वाली अज्ञात बीमारी से जून के अंत से अब तक कम से कम सात बच्चों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि जिले के बिरसा विकासखंड के अडोरी, मच्छुरदा पंचायत, बोंदारी और कुंडेकसा समेत कई गांवों में यह बीमारी फैली है। इस बीमारी से मौत का नया मामला सोमवार रात दर्ज किया गया जब जिला अस्पताल में उपचार के दौरान तीन वर्षीय बच्ची की मौत हो गयी। इसके साथ ही इस बीमारी से मृतकों की संख्या सात हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि मृत बच्ची की पहचान स्थानीय निवासी सुखचंद धुर्वे की बेटी प्रियंका के रूप में हुई है। उसे नौ अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अगले दिन उसकी मौत हो गई।
सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने बच्ची की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि वह कई बीमारियों से पीड़ित थी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. परेश उपल्लव ने बताया कि 26 जून से छह अगस्त के बीच बोंदारी और कुंडेकसा गांवों के छह बच्चों की मौत हुई। इनमें लमानिन धुर्वे (13), साहिल धुर्वे (1), पूजा धुर्वे (एक वर्ष नौ माह), सचिन मरकाम (5), प्रीति मरकाम (4) और अरविंद धुर्वे (4) शामिल हैं।
एक अन्य बच्चे की भी सोमवार को बीमारी से मौत होने की सूचना है, लेकिन अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
अधिकारियों ने बताया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. रवींद्र विष्णोई, बाल रोग विशेषज्ञों और स्थानीय चिकित्सा कर्मियों की टीम ने प्रभावित बच्चों की जांच की है, लेकिन बीमारी के सटीक कारण का अब तक पता नहीं चल सका है।
चिकित्सकों के अनुसार प्रभावित बच्चों में खून की कमी, शरीर में पानी की कमी, गुर्दे की क्षति, सर्दी, बुखार, एक्जिमा और फंगल संक्रमण जैसे लक्षण पाए जा रहे हैं। बच्चों के शरीर पर रहस्यमय चकत्ते भी उभर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मरीजों के जैविक नमूने लेकर जांच के लिए पुणे स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली स्थित एम्स की एक टीम भी बालाघाट का दौरा कर रही है।
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बुधवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर आदिवासी बहुल जिले में बच्चों की मौतों की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया।
सिंह ने गंभीर चिंता जताते हुए दावा किया कि बालाघाट के बिरसा आदिवासी विकासखंड में पिछले एक सप्ताह में दूषित पानी और संक्रामक बीमारियों के कारण 11 बच्चों की मौत हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि अब तक 100 से अधिक बच्चों को बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 40 से 50 बच्चे जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सिंह ने आदिवासी नेता शुभम उइके के हवाले से कहा कि जिला अस्पताल का बच्चों का वार्ड मरीजों से भर गया है और अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि बोंदारी गांव के मजदूर समरू धुर्वे के दो बच्चों की निमोनिया से मौत हुई, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसी तरह पांच अन्य बच्चों की तेज बुखार से मौत होने का दावा भी पत्र में किया गया है।
सिंह ने मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव को चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा करने तथा वहां चिकित्सा शिविर लगाने के निर्देश देने का अनुरोध किया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले से गरीबी से जूझ रहे आदिवासी परिवार स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने तथा गंभीर रूप से बीमार बच्चों को नागपुर, रायपुर या भोपाल हवाई मार्ग से ले जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करे।



