
ब्यूरो रिपोर्ट हरिद्वार ।
दक्षिण काली मंदिर में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की कतारें, देश-विदेश से ऑनलाइन माध्यम से भी साधना से जुड़ रहे भक्त
हरिद्वार। सावन मास के प्रारंभ के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार में शिवभक्ति और आध्यात्मिक साधना का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से दक्षिण काली मंदिर में परम पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की कठोर शिव साधना श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सावन के प्रथम पांच दिनों में ही महाराज श्री के दर्शन, आशीर्वाद और उनकी साधना के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से हरिद्वार पहुंच रहे हैं। वहीं विदेशों में रहने वाले भक्त भी ऑनलाइन माध्यम से इस आध्यात्मिक अनुष्ठान से जुड़कर साधना और रुद्राभिषेक के दर्शन कर रहे हैं।
दक्षिण काली मंदिर परिसर में सावन के पहले दिन से ही भक्तों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की कतारें देखने को मिल रही हैं। श्रद्धालु भगवान शिव का पूजन-अर्चन करने के साथ ही आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की साधना के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर का वातावरण हर-हर महादेव और भगवान शिव के जयकारों से भक्तिमय बना हुआ है।
22 घंटे एक ही आसन पर शिव आराधना
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज सावन मास में प्रतिदिन लगभग 22 घंटे तक एक ही आसन पर बैठकर भगवान शिव की आराधना, जप, ध्यान और रुद्राभिषेक में लीन रहते हैं। उनकी यह कठोर साधना श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुशासन, तप और शिवभक्ति की प्रेरणा बनी हुई है।
महाराज श्री की साधना को देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु दक्षिण काली मंदिर पहुंच रहे हैं। भक्तों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही आसन पर रहकर निरंतर शिव आराधना करना साधना के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और संकल्प को दर्शाता है। यही वजह है कि सावन के शुरुआती दिनों में ही मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है।
प्रत्यक्ष दर्शन के साथ डिजिटल माध्यम से भी जुड़ रहे श्रद्धालु
दक्षिण काली मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश-विदेश के अनेक भक्त डिजिटल माध्यमों के जरिए भी इस साधना से जुड़ रहे हैं। सावन के पहले पांच दिनों में ही लाखों श्रद्धालुओं द्वारा ऑनलाइन माध्यम से साधना और रुद्राभिषेक के दर्शन किए जाने की बात सामने आई है। वहीं हजारों श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से मंदिर पहुंचकर महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं।
डिजिटल माध्यम ने उन भक्तों के लिए भी साधना से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराया है, जो भौगोलिक दूरी अथवा अन्य कारणों से हरिद्वार नहीं पहुंच पा रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों में रहने वाले सनातन श्रद्धालु भी ऑनलाइन माध्यम से भगवान शिव की आराधना और महाराज श्री की साधना से जुड़ रहे हैं।
राष्ट्र और विश्व कल्याण की भावना से जुड़ी साधना
श्रद्धालुओं के अनुसार स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की साधना केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक तपस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्र, समाज और समस्त विश्व के कल्याण की भावना भी निहित है। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना, जप, ध्यान और रुद्राभिषेक के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सकारात्मकता का संचार करने का प्रयास किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि महाराज श्री की कठोर साधना उन्हें शिवभक्ति, आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुशासन की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त दक्षिण काली मंदिर पहुंच रहे हैं और साधना के दर्शन कर स्वयं को आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।
दक्षिण काली मंदिर बना सावन का प्रमुख आध्यात्मिक आकर्षण
सावन के पहले पांच दिनों में ही दक्षिण काली मंदिर हरिद्वार में आस्था, साधना और शिवभक्ति के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और देश-विदेश से ऑनलाइन जुड़ रहे भक्त इस बात का संकेत हैं कि स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की साधना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
सावन के आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना के बीच दक्षिण काली मंदिर में भक्ति, तप और आध्यात्मिक साधना का यह क्रम निरंतर जारी रहने की उम्मीद है। भगवान शिव की आराधना के इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालु जहां दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं, वहीं महाराज श्री की कठोर साधना उनके लिए सनातन परंपरा, तप और आध्यात्मिक निष्ठा का प्रेरणादायी उदाहरण बनी हुई है।
मुख्य बिंदु
- सावन के पहले पांच दिनों में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष रूप से दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
- देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त ऑनलाइन माध्यम से साधना और रुद्राभिषेक से जुड़े।
- स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज प्रतिदिन लगभग 22 घंटे एक ही आसन पर रहकर शिव आराधना, जप, ध्यान और रुद्राभिषेक में लीन हैं।
- दक्षिण काली मंदिर में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है।
- महाराज श्री की साधना श्रद्धालुओं के लिए शिवभक्ति, तप, अनुशासन और आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।
- सावन के शुरुआती पांच दिनों में ही दक्षिण काली मंदिर प्रमुख आध्यात्मिक आकर्षण के रूप में चर्चा में है।
