छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज केस की वापसी और गिरफ्तार लोगों की रिहाई पर कॉकरोच जनता पार्टी जंतर-मंतर से उठने के तीसरे दिन से ही दोबारा सड़क पर उतरने की धमकी दे रही है। लिखित आश्वासन की कमी से मामला उलझ गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जंतर-मंतर पर आंदोलन खत्म करने के तीसरे दिन से ही प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई के मुद्दे पर फिर से सड़क पर उतरने की धमकी सरकार को दे रही है। शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ 20 जून को शुरू आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद 25 जुलाई को खत्म हो गया था। सरकार के वार्ताकार व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और सीजेपी के सौरव दास व आशुतोष रांका ने उस दिन कहा था कि दिल्ली और बीजेपी शासित राज्यों में दर्ज केस वापस लेने और भविष्य में भी पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर सहमति बनी है। बिहार और असम में केस वापसी के आदेश निकले और कुछ रिहाई भी हो गई। लेकिन, आश्वासन का लिखित कागज ना होना अब आंदोलन के नेताओं के लिए पछतावा और दोबारा आंदोलन की धमकी देने का आधार बन गया है। सोनम वांगचुक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अपना अनशन 26वें दिन तोड़ा था।
कॉकरोच जनता पार्टी कैंप में लिखित आश्वासन को लेकर खलबली सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को दिए एक अंतरिम आदेश से बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई के दौरान मामले की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाने का संकेत देते हुए आदेश में कहा कि पुलिस दर्ज मामलों में जांच जारी रख सकती है। माना जा रहा है कि एसआईटी पुलिस के खिलाफ दमन के साथ पुलिस पर हमले के आरोपों की भी जांच कर सकती है। दर्ज केस निरस्त होने से एसआईटी के सामने जांच के दौरान यह संकट पैदा हो सकता है कि वो किस मामले की पड़ताल करे। कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच जारी रख सकती है, लेकिन बेदाग लोगों को अरेस्ट ना करे। केंद्र और राज्यों को अगली सुनवाई में 3 अगस्त को अपना पक्ष रखना है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पुलिस जांच जारी रहने की संभावना देखते ही सीजेपी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया और पूछा कि सरकारी वकील ने अदालत को क्यों नहीं बताया कि 25 जुलाई को समझौते के तहत केस वापस लेने का आश्वासन दिया गया है। सीजेपी के नेता सौरव दास ने सरकार से वादा निभाने की अपील की और कहा कि अगर सरकार अदालती आदेश की आड़ में प्रदर्शन में शामिल लोगों को परेशान करती है तो दोबारा आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा। सौरव दास ने कहा कि कोर्ट ने केस वापस लेने पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए बिहार और असम की तरह दूसरे राज्यों में सरकार मुकदमे को आगे ना बढ़ाने का फैसला कर सकती है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने मांग की है कि सरकार अगली सुनवाई में कोर्ट को समझौते की कॉपी देकर आश्वासन के बारे में बताए। सौरव दास ने दावा किया कि 25 जुलाई को जेपी नड्डा ने मुकदमे वापस लेने का जो आश्वासन दिया था, उसका लिखित पत्र 28 जुलाई तक भेजने का भरोसा मिला था। सौरव ने मंगलवार रात दावा किया कि कोर्ट के आदेश का हवाला लेकर सरकार लिखित आश्वासन देने से बच रही है और कह रही है कि मामला अब अदालत के विचाराधीन है। सौरव ने कहा कि सरकार से लिखित आश्वासन नहीं आया है, लेकिन भरोसे का उल्लंघन होता है तो छात्रों की रक्षा के लिए दोबारा आंदोलन करेंगे। लिखित समझौता को लेकर अब पेच फंसने से लगता है कि नई पार्टी के नेताओं में प्रधान के इस्तीफा ने पहले आंदोलन में ही बड़ी सफलता का ऐसा जोश भर दिया कि आंदोलन खत्म करने से पहले सोनम वांगचुक की तरह लिखित आश्वासन लेने का होश नहीं रहा।
25 जुलाई को टीम कॉकरोच से तीसरे दौर की वार्ता के बाद जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह, सौरव दास और आशुतोष रांका ने मीडिया के सामने सहमति बनने और आंदोलन के खत्म होने का ऐलान किया था। नड्डा ने कहा था- ‘ये एक लिखित मसौदा लेकर आए थे, जिसमें आंदोलन को लेकर चल रहे मुकदमों के बारे में चार प्वाइंट्स दिए थे। उसके साथ-साथ जो बाकी दो डिमांड थी, प्रतिशोधात्मक कार्रवाई ना की जाए, मुआवजा दिया जाए और इनके 5 प्वाइंट चार्टर पर विचार हो। उस पर विस्तार से चर्चा हुई। … इनके चार प्वाइंट का लब्बोलुआब ये था कि कोई भी एक्शन, FIR ना हो और अगर है तो वो वापस लिया जाए। वो चाहे दिल्ली पुलिस द्वारा हुआ हो, चाहे वो बीजेपी शासित राज्यों में कहीं हुआ हो। वो FIR कॉपी इनको हम देंगे। और उसको वापस लेने के बाद कोई एक्शन नहीं होगा, इस बात को सरकार ने स्वीकारा है। जो प्रोटेस्टर्स के साथ प्रोटेस्ट के दौरान हुआ है। उसी तरह से भविष्य में भी आयोजकों या प्रदर्शनकारियों पर इस आंदोलन के लिए आगे कोई केस नहीं होगा, इस बात को हम लोगों ने माना है।’
जेपी नड्डा के बाद सौरव दास ने अंग्रेजी में कहा था- ‘हमारी मांगों पर तयशुदा समय सीमा के अंदर अमल के आश्वासन पर बनी सहमति के आधार पर हम आंदोलन खत्म कर रहे हैं।’ आशुतोष रांका ने हिन्दी में कहा था- ‘हमारी तमाम मांगें मान ली गई हैं। हम तत्काल प्रभाव से आंदोलनकारियों से शांतिपूर्वक घर लौटने का आग्रह करते हैं। आगे की जो भी हमारी रणनीति, या बातचीत होगी, उससे हम आपको अवगत कराएंगे। हमारी मांगें मान ली गई है।’
सरकार की तरफ से जेपी नड्डा द्वारा 25 जुलाई को दिए गए आश्वासन के तहत बिहार और असम में केस वापसी का आदेश सरकार ने जारी कर दिया है। बिहार के 20 जिलों में 64 मुकदमे और असम में 5 मुकदमे वापस लिए गए हैं। आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई भी शुरू हो चुकी है। सरकार के आश्वासन के उल्लंघन में कोई पुलिस कार्रवाई होती फिलहाल दिख नहीं रही है, लेकिन आगे सुप्रीम कोर्ट क्या तय करता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।


